कुरान - 2:47 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

47
يَٰبَنِيٓ إِسۡرَـٰٓءِيلَ ٱذۡكُرُواْ نِعۡمَتِيَ ٱلَّتِيٓ أَنۡعَمۡتُ عَلَيۡكُمۡ وَأَنِّي فَضَّلۡتُكُمۡ عَلَى ٱلۡعَٰلَمِينَ

Transliteration: (Yaa Baneee Israaa'eelaz kuroo ni'matiyal lateee an'amtu 'alaikum wa annee faddaltukum 'alal 'aalameen)

[47] ऐ बनी इस्राईल! मेरी खास नेमतों को याद करो [89], जो मैंने तुम पर इनायत की थीं, और यह कि मैंने तुम्हें सारी दुनिया वालों पर फ़ज़ीलत दी थी [90]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-बक़रा आयत 47 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

🔹 [89] बनी इस्राईल को दी गई अल्लाह की नेमतों की याद

बनी इस्राईल (हज़रत याक़ूब अ.स. की औलाद) को याद दिलाया गया कि अल्लाह ने उन्हें कई नेमतें दीं — बहुत से पैग़म्बर भेजे, उन्हें क़ौमी और दीनी रहनुमा बनाया, और दुनिया की दूसरी क़ौमों पर इज़्ज़त बख़्शी। ये नेमतें उन्हें शुक्रगुज़ारी का पाबंद बनाती हैं।

🔸 [90] इस तज़किरा से दो अहम बातें सीखने को मिलती हैं

  1. अल्लाह की नेमतों को याद करना खुद एक इबादत है। इसलिए मीलाद-उन-नबी या शब-ए-मेराज जैसी यादगारी महफ़िलें बिदअत नहीं, बल्कि अल्लाह की नेमतों पर शुक्र और इबादत का तरीका हैं।
  2. नेक नसब (वंश) भी एक इज़्ज़त का सबब होता है। बनी इस्राईल को यह मक़ाम इसलिए मिला क्योंकि वे पैग़म्बरों की औलाद थे। इसी तरह उम्मत-ए-मुहम्मदी में सय्यदों (पैग़म्बर ﷺ की औलाद) का मुक़द्दस दर्जा एक अमानत है — इज़्ज़त के साथ ज़िम्मेदारी भी।

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