कुरान - 2:46 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

46
ٱلَّذِينَ يَظُنُّونَ أَنَّهُم مُّلَٰقُواْ رَبِّهِمۡ وَأَنَّهُمۡ إِلَيۡهِ رَٰجِعُونَ

Transliteration: (Allazeena yazunnoona annahum mulaaqoo Rabbihim wa annahum ilaihi raaji'oon)

[46] जो यक़ीन रखते हैं [87] कि वे अपने रब से मिलने वाले हैं और यह कि वे उसी की ओर लौटाए जाएँगे [88]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-बक़रा आयत 46 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

🔹 [87] “ज़न्न” का मतलब यहाँ पक्का यक़ीन है

क़ुरआन में “ज़न्न” का मतलब कई बार पक्के यक़ीन से होता है, जैसा कि यहाँ है।
इस आयत में नम्र लोगों की पहचान बताई गई है कि वे आख़िरत, अल्लाह से मुलाक़ात और हिसाब-किताब पर पूरा यक़ीन [87] रखते हैं।

🔸 [88] नमाज़ की पाबंदी — यक़ीन की अलामत

जो लोग नमाज़ में पाबंद होते हैं, वे दरअसल वही लोग हैं जिन्हें आख़िरत में वापसी का यक़ीन [88] होता है।
सिर्फ़ रोज़ा, हज या दूसरे काम नहीं — बल्कि सच्चा ईमान नमाज़ से झलकता है।

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