कुरान - 2:55 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

55
وَإِذۡ قُلۡتُمۡ يَٰمُوسَىٰ لَن نُّؤۡمِنَ لَكَ حَتَّىٰ نَرَى ٱللَّهَ جَهۡرَةٗ فَأَخَذَتۡكُمُ ٱلصَّـٰعِقَةُ وَأَنتُمۡ تَنظُرُونَ

Transliteration: (Wa iz qultum yaa Moosaa lan nu'mina laka hattaa naral laaha jahratan fa akhazat kumus saa'iqatu wa antum tanzuroon)

और जब तुमने कहा: 'ऐ मूसा! हम आप पर हरगिज़ ईमान नहीं लाएंगे जब तक कि हम अल्लाह को साफ़-साफ़ (अपनी आंखों से) न देख लें', तो तुम्हें कड़क (बिजली) ने आ पकड़ा और तुम देख रहे थे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-बक़रा आयत 55 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-बक़रह - आयत 55

✅ दीदारे इलाही की सरकश शर्त

बनी इसराईल के सत्तर सरदारों ने तौरात के अहकाम सुनकर यह नाफ़रमानी की शर्त रखी कि हम अल्लाह को अपनी आंखों से देखेंगे तब मानेंगे; इस गुस्ताख़ी पर आसमानी कड़क और बिजली ने उन्हें ढेर कर दिया।

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