Transliteration: (Wa iz aatainaa Moosal kitaaba wal Furqaana la'allakum tahtadoon)
इस आयत में "हिदायत" से मुराद है — अच्छे कामों की रहनुमाई, न कि ईमान की शुरुआत, क्योंकि बनी इस्राईल पहले ही ईमान ला चुके थे।
पैग़म्बर इंसान को ईमान की तरफ़ बुलाते हैं, और किताब उन्हें नेक आमाल की रहनुमाई देती है।
इसीलिए, किसी गैर-मुस्लिम को पहले कलिमा पढ़ाकर ईमान दिलाया जाता है, फिर उसे कुरआन और नेक काम सिखाए जाते हैं।
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