कुरान - 2:53 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

53
وَإِذۡ ءَاتَيۡنَا مُوسَى ٱلۡكِتَٰبَ وَٱلۡفُرۡقَانَ لَعَلَّكُمۡ تَهۡتَدُونَ

Transliteration: (Wa iz aatainaa Moosal kitaaba wal Furqaana la'allakum tahtadoon)

[53] और जब हमने मूसा को किताब और फ़ैसला (Criterion) [97] दिया, ताकि तुम हिदायत पाओ। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-बक़रा आयत 53 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

🔹 [97] किताब से हिदायत देने का मक़सद

इस आयत में "हिदायत" से मुराद है — अच्छे कामों की रहनुमाई, न कि ईमान की शुरुआत, क्योंकि बनी इस्राईल पहले ही ईमान ला चुके थे।
पैग़म्बर इंसान को ईमान की तरफ़ बुलाते हैं, और किताब उन्हें नेक आमाल की रहनुमाई देती है।
इसीलिए, किसी गैर-मुस्लिम को पहले कलिमा पढ़ाकर ईमान दिलाया जाता है, फिर उसे कुरआन और नेक काम सिखाए जाते हैं।

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