कुरान - 2:54 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

54
وَإِذۡ قَالَ مُوسَىٰ لِقَوۡمِهِۦ يَٰقَوۡمِ إِنَّكُمۡ ظَلَمۡتُمۡ أَنفُسَكُم بِٱتِّخَاذِكُمُ ٱلۡعِجۡلَ فَتُوبُوٓاْ إِلَىٰ بَارِئِكُمۡ فَٱقۡتُلُوٓاْ أَنفُسَكُمۡ ذَٰلِكُمۡ خَيۡرٞ لَّكُمۡ عِندَ بَارِئِكُمۡ فَتَابَ عَلَيۡكُمۡۚ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلتَّوَّابُ ٱلرَّحِيمُ

Transliteration: (Wa iz qaala Moosaa liqawmihee yaa qawmi innakum zalamtum anfusakum bittikhaa zikumul 'ijla fatoobooo ilaa Baari'ikum faqtulooo anfusakum zaalikum khairul lakum 'inda Baari'ikum fataaba 'alaikum; innahoo Huwat Tawwaabur Raheem)

और जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा: 'ऐ मेरी क़ौम! बेशक तुमने बछड़े को (माबूद) बनाकर अपनी जानों पर ज़ुल्म किया है, पस अपने पैदा करने वाले (ख़ालिक़) की तरफ़ तौबा करो और अपने आपको क़त्ल करो; यह तुम्हारे ख़ालिक़ के नज़दीक तुम्हारे हक़ में बेहतर है', फिर उसने तुम्हारी तौबा क़बूल फ़रमाई; बेशक वही बड़ा तौबा क़बूल करने वाला, निहायत रहम फ़रमाने वाला है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-बक़रा आयत 54 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-बक़रह - आयत 54

✅ बछड़े की पूजा की तौबा और सज़ा

सामरी के बहकावे में आकर बछड़े की परस्तिश करने वाले मुजरिमों के लिए बनी इसराईल की शरीअत में यह सख़्त तौबा मुक़र्रर हुई थी कि जिन्होंने शिर्क नहीं किया था वे शिर्क करने वालों को क़त्ल करें, फिर अल्लाह ने उनकी तौबा क़बूल फ़रमाई।

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