कुरान - 2:56 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

56
ثُمَّ بَعَثۡنَٰكُم مِّنۢ بَعۡدِ مَوۡتِكُمۡ لَعَلَّكُمۡ تَشۡكُرُونَ

Transliteration: (Summa ba'asnaakum mim ba'di mawtikum la'allakum tashkuroon)

[56] फिर हमने तुम्हें तुम्हारी मौत के बाद ज़िंदा किया, ताकि तुम शुक्रगुज़ार बनो [101]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-बक़रा आयत 56 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

🔹 [101] नेक लोगों की दुआ की ताक़त

हज़रत मूसा ने अल्लाह से दुआ की कि इन 70 लोगों को दुबारा ज़िंदगी अता फ़रमा दे, वरना बनी इस्राईल उन्हें इनकी मौत का इल्ज़ाम देंगे।
अल्लाह ने हज़रत मूसा की दुआ कुबूल की और उन्हें ज़िंदा कर दिया।
इस वाक़ये से मालूम होता है कि नेक बंदों की दुआ में बहुत ताक़त होती है — यहां तक कि वो मुर्दों को भी ज़िंदा करवा सकती है।
इन 70 लोगों की उम्र पूरी हो चुकी थी, और वो मरे थे। लेकिन हज़रत मूसा की दुआ से उन्हें नई ज़िंदगी मिली।
इससे ये भी साबित होता है कि नेक लोगों की दुआ से तक़दीर तक बदल सकती है।

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