Transliteration: (Wa iz qulnad khuloo haazihil qaryata fakuloo minhaa haisu shi'tum raghadanw wadkhulul baaba sujjadanw wa qooloo hittatun naghfir lakum khataayaakum; wa sanazeedul muhsineen)
जब बनी इसराईल को तीह (रेगिस्तान) से राहत मिली, तो उन्हें हुक्म हुआ कि येरुशलम (या "अरीहा") में दाखिल हो जाएँ।
उस समय वहाँ अमालिका नाम की एक क़ौम रहती थी।
जब बनी इसराईल ने उन्हें हराया, तब उन्हें इस बस्ती में सुकून और आराम से रहने की इजाज़त दी गई।
यह शहर बाग़-बग़ीचों, फलदार दरख़्तों और नेमतों से भरा हुआ था।
बनी इसराईल को हुक्म दिया गया कि वे इस शहर में सिज्दा करते हुए और सर झुकाकर दाख़िल हों।
इसका मक़सद था कि वे इस मुक़द्दस जगह की ताज़ीम करें।
इससे यह हिकमत निकलती है कि हर मुक़द्दस जगह की अदब और इज़्ज़त फ़र्ज़ है, जैसे अल्लाह ने फ़रमाया:
"और जो अल्लाह की निशानियों का एहतराम करता है, तो यह दिलों की परहेज़गारी में से है।" (सूरह अल-हज्ज: 32)
इसी तरह, यह भी पता चलता है कि पैग़म्बरों के शहर मुक़द्दस होते हैं — जैसे येरुशलम।
"बेशक सफा और मरवा अल्लाह की निशानियों में से हैं।" (सूरह अल-बक़रह: 158)
👉 अल्लाह इन जगहों पर:
👉 एक और हिकमत यह भी है:
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