कुरान - 2:60 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

60
۞وَإِذِ ٱسۡتَسۡقَىٰ مُوسَىٰ لِقَوۡمِهِۦ فَقُلۡنَا ٱضۡرِب بِّعَصَاكَ ٱلۡحَجَرَۖ فَٱنفَجَرَتۡ مِنۡهُ ٱثۡنَتَا عَشۡرَةَ عَيۡنٗاۖ قَدۡ عَلِمَ كُلُّ أُنَاسٖ مَّشۡرَبَهُمۡۖ كُلُواْ وَٱشۡرَبُواْ مِن رِّزۡقِ ٱللَّهِ وَلَا تَعۡثَوۡاْ فِي ٱلۡأَرۡضِ مُفۡسِدِينَ

Transliteration: (Wa izis tasqaa Moosaa liqawmihee faqulnad rib bi'asaakal hajara fanfajarat minhusnataaa 'ashrata 'aynan qad 'alima kullu unaasim mash rabahum kuloo washraboo mir rizqil laahi wa laa ta'saw fil ardi mufsideen)

[60] और याद करो जब मूसा ने अपनी क़ौम के लिए पानी मांगा, तो हमने कहा: "अपनी लाठी से पत्थर पर मारो।" तभी उसमें से बारह [108] सोते फूट निकले। हर गिरोह ने अपना पानी पीने की जगह पहचान ली। अल्लाह की रोज़ी में से खाओ और पियो, और धरती में फसाद फैलाते न फिरो। [109] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-बक़रा आयत 60 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

🔹 [108] पत्थर से बारह चश्मों का चमत्कार

यह हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम का एक बड़ा मोजिज़ा था।
उनकी दुआ पर अल्लाह ने हुक्म दिया कि वे अपनी लाठी से एक पत्थर पर मारें —
और उसी वक्त उसमें से बारह पानी के सोते (चश्मे) फूट निकले,
हर एक सोता बनी इसराईल के बारह क़बीलों में से एक के लिए तय था।

👉 यह मोजिज़ा उस जंगल "तीह" में हुआ था जहाँ बनी इसराईल भटक रहे थे।

🔹 [109] नाफरमानी से नेमतें छिनती हैं

आख़िर में अल्लाह ने ताकीद की:

"अल्लाह की रोज़ी से खाओ-पियो, मगर ज़मीन में फसाद मत फैलाओ।"

📌 यानी अगर तुम अल्लाह की नेमतों का सही इस्तेमाल नहीं करोगे,
गुनाहों और ज़ुल्म में पड़ जाओगे —
तो ये नेमतें भी छिन सकती हैं।

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