कुरान - 2:84 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

84
وَإِذۡ أَخَذۡنَا مِيثَٰقَكُمۡ لَا تَسۡفِكُونَ دِمَآءَكُمۡ وَلَا تُخۡرِجُونَ أَنفُسَكُم مِّن دِيَٰرِكُمۡ ثُمَّ أَقۡرَرۡتُمۡ وَأَنتُمۡ تَشۡهَدُونَ

Transliteration: (Wa iz akhaznaa meesaa qakum laa tasfikoona dimaaa'akum wa laa tukhrijoona anfusakum min diyaarikum summa aqrartum wa antum tashhadoon)

[84] और (याद करो) जब हमने तुमसे यह वचन लिया [155]: "तुम एक-दूसरे का खून न बहाना, और न ही एक-दूसरे को अपने नगरों से निकालना।" फिर तुमने इस पर इकरार किया, और तुम खुद इसके गवाह थे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-बक़रा आयत 84 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

[155]

क़बायली झगड़ों में बनी इस्राईल की दोहरी नीति:
अल्लाह तआला ने बनी इस्राईल को सख़्ती से मना किया था कि वे:

  • आपस में एक-दूसरे का खून न बहाएं
  • एक-दूसरे को बस्तियों से न निकालें
  • अगर कोई क़ैद हो जाए तो फ़िदिया देकर उसे छुड़ाएं

लेकिन उन्होंने इस इलाही अहद को तोड़ दिया। ख़ासकर बanu कुरैज़ा और बanu नज़ीर के रवैये में यह दोहरापन ज़ाहिर हुआ।

  • ये क़बीलों के झगड़ों में एक-दूसरे के खिलाफ लड़ते
  • एक-दूसरे को बस्तियों से निकालते
  • और फिर जब उनका ही कोई क़ैद हो जाता, तो उसे छुड़ाने के लिए दौड़ पड़ते

इस आयत में अल्लाह इनकी इसी दोहरी नीति को फटकारते हैं—जबकि उन्होंने खुद इस अहद को स्वीकार किया था और उस पर गवाही दी थी, फिर भी उसे निभाया नहीं।

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