कुरान - 2:90 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

90
بِئۡسَمَا ٱشۡتَرَوۡاْ بِهِۦٓ أَنفُسَهُمۡ أَن يَكۡفُرُواْ بِمَآ أَنزَلَ ٱللَّهُ بَغۡيًا أَن يُنَزِّلَ ٱللَّهُ مِن فَضۡلِهِۦ عَلَىٰ مَن يَشَآءُ مِنۡ عِبَادِهِۦۖ فَبَآءُو بِغَضَبٍ عَلَىٰ غَضَبٖۚ وَلِلۡكَٰفِرِينَ عَذَابٞ مُّهِينٞ

Transliteration: (Bi'samash taraw biheee anfusahum ai yakfuroo bimaaa anzalal laahu baghyan ai yunazzilal laahu min fadlihee 'alaa mai yashaaa'u min ibaadihee fabaaa'oo bighadabin 'alaa ghadab; wa lilkaafireena 'azaabum muheen)

[90] कितना बुरा है वह (मोल) जिसके बदले उन्होंने अपने आप को बेच दिया [169] — कि वे उस चीज़ का इनकार करते हैं जिसे अल्लाह ने नाज़िल किया, सिर्फ़ इसलिए कि अल्लाह अपने बंदों में से जिसे चाहे अपनी रहमत से नवाज़ता है [170]। तो उन पर एक के बाद एक ग़ज़ब उतरता गया [171]। और इनकार करने वालों के लिए ज़िल्लत भरी सज़ा है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-बक़रा आयत 90 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

[169] ज़िंदगी एक सौदा है, ईमान सबसे बेहतरीन निवेश

उन्होंने ईमान को ठुकरा कर अपने आप को बर्बादी में झोंक दिया — जैसे कोई बहुत ही घाटे का सौदा करता है। हर इंसान एक सौदागर की तरह है, उसकी ज़िंदगी एक बाज़ार है और हर सांस एक सौदा है। जो इस ज़िंदगी को अच्छे अमाल कमाने में लगाता है, वो सफल है; और जो कुफ्र और गुनाह में लगाता है, वो दीवालिया है।

[170] हसद ने बना दिया हक़ का इंकारी

बनी इसराईल इसलिए नाराज़ थे कि आख़िरी नबूवत उनके क़बीले में नहीं आई, बल्कि एक अरब — हज़रत मुहम्मद ﷺ को मिली। इस हसद ने उन्हें अंधा कर दिया, और उन्होंने जानने के बावजूद हक़ का इनकार कर दिया। इससे ये सीख मिलती है कि हसद इंसान को हक़ से रोक सकता है।

[171] एक के बाद एक अल्लाह का ग़ज़ब

अपने घमंड और इंकार के कारण, उन्होंने अल्लाह का ग़ज़ब बार-बार झेला — कभी ज़िल्लत, कभी तबाही, कभी अल्लाह की फटकार। और आख़िर में, उनके लिए इस दुनिया में भी रुसवाई है और आख़िरत में भी ज़िल्लत भरी सज़ा तय है।

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