Transliteration: (Qul man kaana 'aduwwal li Jibreela fainnahoo nazzalahoo 'alaa qalbika bi iznil laahi musaddiqal limaa baina yadaihi wa hudanw wa bushraa lilmu'mineen)
कुछ यहूदियों ने झूठा दावा किया कि वे जिबरील (अलैहिस्सलाम) के दुश्मन हैं क्योंकि वे सज़ा लेकर आते थे, रहमत नहीं।
इस पर अल्लाह ने हुक्म दिया कि पैग़म्बर ﷺ ऐलान करें: "जो कोई जिबरील का दुश्मन है..."
हक़ीक़त में, जिबरील से दुश्मनी अल्लाह के पैग़ाम और उसके आदेश से दुश्मनी है, क्योंकि जिबरील सिर्फ़ अल्लाह का हुक्म पूरा करने वाले एक अमीन फ़रिश्ते हैं।
इस आयत में बताया गया कि जिबरील (अलैहिस्सलाम) ने क़ुरआन को हज़रत मुहम्मद ﷺ के दिल पर उतारा।
यह दर्शाता है कि:
इस आयत में क़ुरआन की तीन अहम भूमिकाएं बताई गई हैं:
इसलिए, जो जिबरील या क़ुरआन को नहीं मानता, वह दरअसल अल्लाह की रहमत और हिदायत को ठुकरा रहा है — न कि किसी फ़रिश्ते या किताब को।
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