कुरान - 113:1 सूरह अल-फ़लक़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

1
قُلۡ أَعُوذُ بِرَبِّ ٱلۡفَلَقِ

Transliteration: (Qul a'oozu bi rabbil-falaq )

1.मैं सुबह के रब की पनाह चाहता हूं।[2] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फ़लक़ आयत 1 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सुरह अल-फ़लक़ के नाज़िल होने का कारण

जादू का वाक़िया

7वीं हिजरी के दौरान, हुदैबिया के मुआहिदे (संधि) के बाद, यहूदी सरदारों ने अपने साथी लुबैद बिन आसिम से कहा कि उनकी बेटियाँ जादूगरी में बेजोड़ हैं। उन्होंने लुबैद से अर्ज़ किया कि वो हुज़ूर (صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ) पर जादू का असर करे। लुबैद ने एक यहूदी नौकर की मदद से हुज़ूर (صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ) की कंघी के टूटे हुए दाँत और कुछ मुबारक बाल हासिल कर लिए। उसने एक मोमबत्ती से पुतला बनाया, उसमें ग्यारह सुइयाँ चुभाईं और एक डोरी में ग्यारह गिरह (गाँठें) लगाईं। ये तमाम चीज़ें पुतले के अंदर रखकर एक पत्थर के नीचे रावान कूँए के पानी में दबा दीं।

जादू का असर

इस जादू का असर ये हुआ कि हुज़ूर (صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ) को कुछ दुनियावी मामलात में भूल होने लगी, लेकिन ये असर सिर्फ़ ज़ाहिरी (दुनियावी) था और उनके नबूवत के मर्तबे पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। ये हालत छः महीने तक जारी रही, जब तक हज़रत जिब्रईल अमीन (علیہ السلام) दो सुरहें, अल-फ़लक़ और अन-नास लेकर नाज़िल नहीं हुए। इन सुरहों में ग्यारह आयतें थीं, जो जादू का तोड़ थीं।

जादू का इलाज

हुज़ूर (صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ) ने हज़रत अली (رَضِيَ ٱللَّٰهُ عَنْهُ) को कूँए के अंदर से जादू की चीज़ें निकालने के लिए भेजा। हुज़ूर (صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ) ने इन आयतों की तिलावत की। हर आयत पढ़ने पर एक गिरह खुलती गई, यहाँ तक कि सारी गिरहें खुल गईं और हुज़ूर (صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ) इससे मुकम्मल तौर पर सेहतयाब हो गए।

सीखने वाली बातें:

1. जादू की हक़ीक़त

जादू एक हक़ीक़त है और इसका असर इंसानों पर हो सकता है।

2. अम्बिया पर असर

जादू अम्बिया (पैग़म्बर) के जिस्मानी (शारीरिक) हालात पर असर डाल सकता है, जैसे तलवार, तीर या नेज़े का असर होता है। लेकिन यह उनके नबूवत के मर्तबे (स्तर) को प्रभावित नहीं करता।
यह वाक़िया हज़रत मूसा (علیہ السلام) के ज़माने में जादूगरों के मुक़ाबले से मिलता-जुलता है। अल्लाह तआला ने फ़रमाया:
"वो उन्हें ऐसा मालूम हुआ जैसे वो चल रहे हों।" (सुरह ताहा: आयत 66)

3. नबूवत की हिफ़ाज़त

अल्लाह तआला अपने नबियों की अक़्ल (बुद्धि) और नबूवत को जादू के बुरे असर से महफ़ूज़ (सुरक्षित) रखता है, ताकि दीन की तब्लीग़ (प्रचार) में कोई रुकावट न हो।

4. जादू से बचाव के उपाय

अपने बाल, टूटी हुई कंघी और इसी तरह की चीज़ों को महफ़ूज़ (सुरक्षित) रखना चाहिए, क्योंकि इनका इस्तेमाल जादू के लिए किया जा सकता है।

5. हिफ़ाज़ती तदाबीर (सुरक्षात्मक उपाय)

जादू के असर को मिटाने के लिए दुआ पढ़ना और तावीज़ पहनना जायज़ है।

6. दुआओं के ज़रिये शिफ़ा

जिस तरह अल्लाह सुबह के ज़रिये अंधेरे को दूर करता है, उसी तरह बीमारियों को दुआओं के ज़रिये दूर करता है। दुआ मांगते वक़्त अल्लाह के उन सिफ़ात (गुणों) का ज़िक्र करना चाहिए जो हमारी ज़रूरत से मेल खाती हों।

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