Transliteration: (Wa min sharrin-naffaa-saati fil 'uqad )
इसका मतलब यह है कि लुबैद की बेटियाँ, जो जादू-टोने (magic) का काम करती थीं, उन्होंने हुज़ूर (صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ) के मुबारक (blessed) बालों पर डोरी (string) के ज़रिए फूंक मारी और ग्यारह गिरहें (knots) बनाई। इस से हमें यह सीखने को मिलता है कि अगर जादूगर की फूंक में असर हो सकता है, तो निःसंदेह कुरआन की आयतों का तिलावत (recitation), अल्लाह के नामों और उनके मुबारक नामों का ज़िक्र करके फूंक मारने से व्यक्ति पर बड़ा असर हो सकता है।
तिब्बी इलाज (medical treatment) के लिए कुरआनी आयतों का तिलावत करना
यह जायज़ (permissible) है कि बीमारी से ग्रस्त (ill) लोगों पर कुरआन की आयतें पढ़ी जाएं, उन पर फूंक मारी जाए, या उन्हें तावीज़ (amulet) बना कर पहनाया जाए, या उन्हें गिरहों में बांधकर सुरक्षा (protection) के लिए इस्तेमाल किया जाए। खुद हुज़ूर (صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ) बीमार लोगों पर तिब्बी इलाज के लिए फूंक मारते थे और उनकी सुरक्षा के लिए भी ऐसा करते थे।
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