Transliteration: (Wa min sharri ghaasiqin izaa waqab )
अशुभ वक़्त और पनाह की मांगना
चाँद ग्रहण या माह के आखिरी दिनों में, जब चाँद नज़र नहीं आता, तो इन वक़्तों को अक्सर जादू-टोने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह इस बात को उजागर करता है कि कुछ वक़्त अशुभ और खतरे के संकेत हो सकते हैं। ऐसे समय में ईमानदारों को अल्लाह तआला से पनाह मांगने की हिदायत दी गई है।
अल्लाह तआला फ़रमाता है:
"हमने उन पर एक ही ज़ोरदार आवाज़ भेजी, और वे बाड़ बनाने वाले के सूखे हुए लकड़ी के टुकड़ों की तरह हो गए।" (सुरह अल-क़मर: आयत 19)
यह आयत इस बात पर ज़ोर देती है कि जब भी हमें किसी अशुभ या कमजोर वक़्त का अहसास हो, हमें अल्लाह की पनाह में आना चाहिए और उसी पर भरोसा करना चाहिए।
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