Transliteration: (Wa qawma Noohin lammaa kazzabur Rusula aghraqnaahum wa ja'alnaahum linnaasi Aayatanw wa a'tadnaa lizzaalimeena 'azaaban aleemaa)
"और नूह की क़ौम ने जब रसूलों को झुठलाया [68], तो हमने ग़र्क़ कर दिया और लोगों के लिए निशानी बना दिया [69]; और ज़ालिमों के लिए दर्दनाक अज़ाब तैयार कर रखा है [70]।"
क़ौम-ए-नूह ने अगरचे सिर्फ़ हज़रत नूह अलैहिस्सलाम को झुठलाया था, लेकिन अल्लाह ने फ़रमाया कि 'उन्होंने रसूलों को झुठलाया'—क्योंकि तमाम अंबिया का दीन एक ही था। किसी एक नबी का इंकार करना दरअस्ल तमाम अंबिया-ए-किराम का इंकार करना है।
हज़रत नूह की क़ौम साढ़े नौ सौ साल की तब्लीग़ के बावजूद जब ईमान न लाई, तो अल्लाह ने आसमान और ज़मीन से पानी का तूफ़ान भेजकर पूरी काफ़िर क़ौम को ग़र्क़ कर दिया और आने वाली नस्लों के लिए इब्रत की अज़ीम निशानी बना दिया।
दुनिया में ग़र्क़ होने के बाद अब आख़िरत में भी उन सरकशों के लिए जहन्नम की भड़कती हुई आग का दर्दनाक अज़ाब तैयार है।
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