कुरान - 22:17 सूरह अल-हज् अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

17
إِنَّ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَٱلَّذِينَ هَادُواْ وَٱلصَّـٰبِـِٔينَ وَٱلنَّصَٰرَىٰ وَٱلۡمَجُوسَ وَٱلَّذِينَ أَشۡرَكُوٓاْ إِنَّ ٱللَّهَ يَفۡصِلُ بَيۡنَهُمۡ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِۚ إِنَّ ٱللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ شَهِيدٌ

Transliteration: (Innal lazeena aamanoo wallazeena haadoo was saabi'eena wan nasaaraa wal Majoosa wallazeena ashrakooo innal laaha yafsilu bainahum yawmal qiyaamah; innal laaha 'alaa kulli shai'in shaheed)

17. बेशक जो लोग ईमान लाए (मुसलमान), और जो यहूदी हुए, और साबिई, और ईसाई, और मजूसी (आग पूजने वाले) [37], और जिन्होंने शिर्क किया [38]—बेशक अल्लाह क़ियामत के दिन उन सबके दरमियान फ़ैसला फ़रमा देगा [39]; बेशक अल्लाह हर चीज़ पर पूरी तरह गवाह है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हज् आयत 17 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हज्ज — आयत 17 की तफ़सीर

"बेशक जो लोग ईमान लाए (मुसलमान), और जो यहूदी हुए, और साबिई, और ईसाई, और मजूसी (आग पूजने वाले) [37], और जिन्होंने शिर्क किया [38]—बेशक अल्लाह क़ियामत के दिन उन सबके दरमियान फ़ैसला फ़रमा देगा [39]; बेशक अल्लाह हर चीज़ पर पूरी तरह गवाह है।"

[37] छह मज़ाहिब का ज़िक्र

इस आयत में उस ज़माने के छह बड़े मज़ाहिब का ज़िक्र फ़रमाया गया: मुसलमान (अहले हक़), यहूदी, साबिई (सितारा परस्त), ईसाई, मजूसी (आतिश परस्त), और मुशरिक़ीन (बुत परस्त)।

[38] शिर्क और कुफ़्र के मरातिब

यहूद व नसारा अहले किताब हैं, जबकि मुशरिक़ीन और मजूसी बिल्कुल बे-किताब हैं। शरीअत में इनके अहकाम में फ़र्क़ रखा गया है।

[39] क़ियामत के दिन क़तई फ़ैसला

क़ियामत के दिन अल्लाह तआला इन तमाम गिरोहों के दरमियान हक़ीक़ी और इंसाफ़ का फ़ैसला फ़रमाएगा — अहले ईमान जन्नत में जाएंगे और बाक़ी तमाम बातिल मज़ाहिब वाले जहन्नम का ईंधन बनेंगे।

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