Transliteration: (Innal lazeena aamanoo wallazeena haadoo was saabi'eena wan nasaaraa wal Majoosa wallazeena ashrakooo innal laaha yafsilu bainahum yawmal qiyaamah; innal laaha 'alaa kulli shai'in shaheed)
"बेशक जो लोग ईमान लाए (मुसलमान), और जो यहूदी हुए, और साबिई, और ईसाई, और मजूसी (आग पूजने वाले) [37], और जिन्होंने शिर्क किया [38]—बेशक अल्लाह क़ियामत के दिन उन सबके दरमियान फ़ैसला फ़रमा देगा [39]; बेशक अल्लाह हर चीज़ पर पूरी तरह गवाह है।"
इस आयत में उस ज़माने के छह बड़े मज़ाहिब का ज़िक्र फ़रमाया गया: मुसलमान (अहले हक़), यहूदी, साबिई (सितारा परस्त), ईसाई, मजूसी (आतिश परस्त), और मुशरिक़ीन (बुत परस्त)।
यहूद व नसारा अहले किताब हैं, जबकि मुशरिक़ीन और मजूसी बिल्कुल बे-किताब हैं। शरीअत में इनके अहकाम में फ़र्क़ रखा गया है।
क़ियामत के दिन अल्लाह तआला इन तमाम गिरोहों के दरमियान हक़ीक़ी और इंसाफ़ का फ़ैसला फ़रमाएगा — अहले ईमान जन्नत में जाएंगे और बाक़ी तमाम बातिल मज़ाहिब वाले जहन्नम का ईंधन बनेंगे।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat