कुरान - 22:22 सूरह अल-हज् अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

22
كُلَّمَآ أَرَادُوٓاْ أَن يَخۡرُجُواْ مِنۡهَا مِنۡ غَمٍّ أُعِيدُواْ فِيهَا وَذُوقُواْ عَذَابَ ٱلۡحَرِيقِ

Transliteration: (Kullamaa araadooo any yakhrujoo minhaa min ghammin u'eedoo feeha wa zooqoo 'azaabal hareeq (section 2))

22. जब कभी वे घुटन और तकलीफ़ की वजह से उसमें से निकलना चाहेंगे [46], तो उसी में दोबारा वापस धकेल दिए जाएंगे, और (कहा जाएगा), 'जलाने वाले अज़ाब का मज़ा चखो!' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हज् आयत 22 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हज्ज — आयत 22 की तफ़सीर

"जब कभी वे घुटन और तकलीफ़ की वजह से उसमें से निकलना चाहेंगे [46], तो उसी में दोबारा वापस धकेल दिए जाएंगे, और (कहा जाएगा), 'जलाने वाले अज़ाब का मज़ा चखो!'"

[46] दोज़ख़ से फ़रार की ना-मुमकिन हसरत

यह आयत जहन्नमियों की बेबसी और मुस्तक़िल नाउम्मीदी का मंज़र खींचती है। कभी-कभी जहन्नम के दरवाज़े खुलते हुए मालूम होंगे, तो अज़ाब के मारे लोग जान छुड़ाने की आख़िरी उम्मीद में दरवाज़ों की तरफ़ दौड़ेंगे। लेकिन जैसे ही वे किनारे पर पहुंचेंगे, फ़रिश्ते उन्हें लोहे के गुर्ज़ों से मार कर फिर गहराई में झोंक देंगे और कहेंगे कि अपनी सरकशी का मज़ा चखो!

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