कुरान - 22:24 सूरह अल-हज् अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

24
وَهُدُوٓاْ إِلَى ٱلطَّيِّبِ مِنَ ٱلۡقَوۡلِ وَهُدُوٓاْ إِلَىٰ صِرَٰطِ ٱلۡحَمِيدِ

Transliteration: (Wa hudooo ilat taiyibi minal qawli wa hudooo ilaaa siraatil hameed)

24. और उन्हें (दुनिया में) पाकीज़ा बात (कलिमा-ए-तौहीद) की हिदायत दी गई थी [49], और उन्हें हम्द वाली ज़ात (अल्लाह) के रास्ते की रहनुमाई की गई थी [50] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हज् आयत 24 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हज्ज — आयत 24 की तफ़सीर

"और उन्हें (दुनिया में) पाकीज़ा बात (कलिमा-ए-तौहीद) की हिदायत दी गई थी [49], और उन्हें हम्द वाली ज़ात (अल्लाह) के रास्ते की रहनुमाई की गई थी [50] ।"

[49] पाकीज़ा क़ौल व कलिमा-ए-तय्यिबा

पाकीज़ा बात से मुराद कलिमा-ए-तय्यिबा (ला इलाहा इल्लल्लाह मुहम्मदुर रसूलुल्लाह), क़ुरआन मजीद की तिलावत, दुरूद शरीफ़ और अल्लाह की हम्द व सना है। यह पाकीज़ा कलिमा अल्लाह की तौफ़ीक़ से मिलता है और दुनिया, क़ब्र और आख़िरत में इंसान की नजात का ज़रिया बनता है।

[50] हमीद (अल्लाह) की सिराते मुस्तक़ीम

यह अम्बिया-ए-किराम और औलिया-ए-इज़ाम का रास्ता है, जैसा कि सूरह फ़ातिहा में फ़रमाया गया: 'सिरातल्लज़ीना अनअमता अलैहिम' (उन लोगों का रास्ता जिन पर तूने इनाम फ़रमाया)। अल्लाह का क़ुर्ब इसी रास्ते पर चलने से नसीब होता है।

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