Transliteration: (Wa iz bawwaanaa li Ibraaheema makaanal Baiti allaa tushrik bee shai'anw wa tahhir Baitiya litaaa'ifeena walqaaa' imeena warrukka 'is sujood)
"और याद कीजिए जब हमने इब्राहीम के लिए (बैतुल्लाह/काबा के) घर की जगह मुक़र्रर फ़रमा दी थी [56] (और हुक्म दिया था) कि 'मेरे साथ किसी चीज़ को शरीक न ठहराना [57], और मेरे घर को तवाफ़ करने वालों, क़ियाम (नमाज़) करने वालों और रुकूअ व सजदा करने वालों के लिए पाक-साफ़ रखना [58] ।'"
काबा की पहली तामीर हज़रत आदम (अलैहिस्सलाम) ने फ़रमाई थी, जो हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) के तूफ़ान के वक़्त उठा ली गई थी। फिर अल्लाह तआला ने हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) को उसी मक़ाम पर दोबारा तामीर करने का हुक्म दिया और एक बादल के साए और तेज़ हवा के ज़रिये उस मुक़द्दस बुनियाद की निशानदेही फ़रमाई।
अम्बिया-ए-किराम माअ़सूम होते हैं और शिर्क से हमेशा पाक रहते हैं। यहाँ हुक्म उम्मत और तमाम इंसानों को तालीम देने के लिए दिया गया कि बैतुल्लाह को ख़ालिस तौहीद का मरकज़ बनाया जाए।
मस्जिदों और ख़ासकर बैतुल्लाह को ज़ाहिरी गन्दगी (कूड़ा-करकट, नापाकी) और बातिनी गन्दगी (शिर्क, बिदअत, बेहूदा बातें) से पाक-साफ़ रखना हज़रत इब्राहीम व इस्माईल (अलैहिमुस्सलाम) की अज़ीम सुन्नत है। तवाफ़, क़ियाम, रुकूअ और सुजूद करने वालों के लिए मस्जिदों को संवारना बाइसे अज्र व सवाब है।
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