कुरान - 22:28 सूरह अल-हज् अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

28
لِّيَشۡهَدُواْ مَنَٰفِعَ لَهُمۡ وَيَذۡكُرُواْ ٱسۡمَ ٱللَّهِ فِيٓ أَيَّامٖ مَّعۡلُومَٰتٍ عَلَىٰ مَا رَزَقَهُم مِّنۢ بَهِيمَةِ ٱلۡأَنۡعَٰمِۖ فَكُلُواْ مِنۡهَا وَأَطۡعِمُواْ ٱلۡبَآئِسَ ٱلۡفَقِيرَ

Transliteration: (Li yashhadoo manaafi'a lahum wa yazkurus mal laahi feee ayyaamimma'loomaatin 'alaa maa razaqahum mim baheematil an'aami fakuloo minhaa wa at'imul baaa'isal faqeer)

28. 'ताकि वे अपने फ़ायदों (दीनी व दुनियावी बरकतों) को देखें [62] और चन्द मुक़र्रर दिनों में उन चौपाया जानवरों पर अल्लाह का नाम लें जो उसने उन्हें अता किए हैं [63]; पस तुम खुद भी उसमें से खाओ और तंगदस्त (मुहताज) फ़क़ीर को भी खिलाओ [64] ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हज् आयत 28 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हज्ज — आयत 28 की तफ़सीर

"'ताकि वे अपने फ़ायदों (दीनी व दुनियावी बरकतों) को देखें [62] और चन्द मुक़र्रर दिनों में उन चौपाया जानवरों पर अल्लाह का नाम लें जो उसने उन्हें अता किए हैं [63]; पस तुम खुद भी उसमें से खाओ और तंगदस्त (मुहताज) फ़क़ीर को भी खिलाओ [64] ।'"

[62] हज के दीनी व दुनियावी मनाफ़ेअ

हज में दोनों तरह के फ़ायदे रखे गए हैं:

  • दीनी फ़ायदे: गुनाहों की मुआफ़ी, रज़ा-ए-इलाही, मुक़द्दस मक़ामात की ज़ियारत और अज़ीम अज्र व सवाब।

  • दुनियावी फ़ायदे: तिजारत, आलमी बिरादरी का इज़्तेमाअ, तआरुफ़ और मआशी बरकतें।

[63] अय्यामे नह्र में ज़िक्रे इलाही व तस्मीया

मुक़र्रर दिनों (अय्याम-ए-मअलूमात) से मुराद ज़िल्हिज्जा की 10 से 12 तारीख़ें हैं। इन दिनों में चौपाया जानवरों (ऊंट, गाय, भेड़, बकरी) को अल्लाह के नाम (बिस्मिल्लाहि अल्लाहु अकबर) के साथ ज़ब्ह किया जाता है।

[64] गोश्ते क़ुर्बानी के अहकाम

क़ुर्बानी करने वाले के लिए अपने ज़बीहे का गोश्त खाना मुस्तहब है (कफ़्फ़ारे की क़ुर्बानी के सिवा)। बेहतर यह है कि गोश्त के तीन हिस्से किए जाएं: एक हिस्सा अपने घर वालों के लिए, एक अज़ीज़ो-अक़ारिब के लिए, और एक हिस्सा ग़रीबों व मोहताजों के लिए।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now