Transliteration: (Li yashhadoo manaafi'a lahum wa yazkurus mal laahi feee ayyaamimma'loomaatin 'alaa maa razaqahum mim baheematil an'aami fakuloo minhaa wa at'imul baaa'isal faqeer)
"'ताकि वे अपने फ़ायदों (दीनी व दुनियावी बरकतों) को देखें [62] और चन्द मुक़र्रर दिनों में उन चौपाया जानवरों पर अल्लाह का नाम लें जो उसने उन्हें अता किए हैं [63]; पस तुम खुद भी उसमें से खाओ और तंगदस्त (मुहताज) फ़क़ीर को भी खिलाओ [64] ।'"
हज में दोनों तरह के फ़ायदे रखे गए हैं:
दीनी फ़ायदे: गुनाहों की मुआफ़ी, रज़ा-ए-इलाही, मुक़द्दस मक़ामात की ज़ियारत और अज़ीम अज्र व सवाब।
दुनियावी फ़ायदे: तिजारत, आलमी बिरादरी का इज़्तेमाअ, तआरुफ़ और मआशी बरकतें।
मुक़र्रर दिनों (अय्याम-ए-मअलूमात) से मुराद ज़िल्हिज्जा की 10 से 12 तारीख़ें हैं। इन दिनों में चौपाया जानवरों (ऊंट, गाय, भेड़, बकरी) को अल्लाह के नाम (बिस्मिल्लाहि अल्लाहु अकबर) के साथ ज़ब्ह किया जाता है।
क़ुर्बानी करने वाले के लिए अपने ज़बीहे का गोश्त खाना मुस्तहब है (कफ़्फ़ारे की क़ुर्बानी के सिवा)। बेहतर यह है कि गोश्त के तीन हिस्से किए जाएं: एक हिस्सा अपने घर वालों के लिए, एक अज़ीज़ो-अक़ारिब के लिए, और एक हिस्सा ग़रीबों व मोहताजों के लिए।
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