Transliteration: (Zaalika wa mai yu'azzim hurumaatil laahi fahuwa khairul lahoo 'inda Rabbih; wa uhillat lakumul an'aamu illaa maa yutlaa 'alaikum fajtanibur rijsa minal awsaani wajtaniboo qawlaz zoor)
"यह (हुक्म है); और जो शख़्स अल्लाह की मुक़र्रर की हुई हुरमतों (अदब वाली चीज़ों) की ताज़ीम करता है [68], तो यह उसके रब के नज़दीक उसके लिए बहुत बेहतर है [69]; और तुम्हारे लिए चौपाए हलाल किए गए हैं सिवाय उनके जो तुम्हें पढ़कर सुनाए गए हैं [70]; पस बुतों की नापाकी से बचो और झूठी बात से परहेज़ करो [71] ।"
हुरमात-ए-इलाही से मुराद वे तमाम मुक़द्दस चीज़ें और अहकाम हैं जिनकी ताज़ीम लाज़िम की गई है—जैसे काबा मुअज़्ज़मा, क़ुरआन मजीद, माहे रमज़ान, हरमैन शरीफ़ैन और नबी करीम ﷺ की तमाम सुन्नतें। इनकी ताज़ीम दरअसल अल्लाह की ताज़ीम है।
बे-अदब की इबादत बेकार है। इबादत की रूह अदब व ताज़ीम है। इब्लीस ने हज़ारों साल इबादत की मगर हज़रत आदम (अलैहिस्सलाम) की बे-अदबी की वजह से हमेशा के लिए मरदूद हो गया।
चौपाया जानवर तुम्हारे लिए हलाल हैं सिवाय उन जानवरों के जिनकी मुमानअत सूरह माइदह (5:3) में बयान की गई—जैसे मुरदार, ख़ून और सुअर का गोश्त व़ग़ैरह।
बुतों की पूजा और झूठी गवाही या झूठी बात दोनों से बचना लाज़िम है। हदीस शरीफ़ में झूठी गवाही को शिर्क के बराबर बड़ा गुनाह क़रार दिया गया है।
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