Transliteration: (Hunafaaa'a lillaahi ghaira mushrikeena bih; wa mai yushrik billaahi faka annamaa kharra minas samaaa'i fatakh tafuhut tairu aw tahwee bihir reehu bee makaanin saheeq)
"अल्लाह के लिए यकसूं (हुनफ़ा) होते हुए, उसके साथ किसी को शरीक न ठहराते हुए [72]; और जो शख़्स अल्लाह के साथ किसी को शरीक ठहराता है, तो गोया वह आसमान से गिर पड़ा, फिर परिंदे उसे उचक ले जाएं या तेज़ हवा उसे किसी बहुत दूर की खाई में फेंक दे [73] !"
ईमान की मिसाल ख़ालिस सोने या खालिस दूध की तरह है जिसमें कोई मिलावट न हो। जब तक दिल में ख़ालिस तौहीद न हो और शिर्क की ज़रा सी भी आमेज़िश हो, तो कोई अमल अल्लाह की बारगाह में क़ुबूल नहीं होता।
अल्लाह तआला ने मुशरिक की तबाही की अज़ीम मिसाल बयान फ़रमाई:
ईमान बुलन्द आसमान की तरह है।
शिर्क आसमान से गिरकर हलाक हो जाने की तरह है।
जो इंसान शिर्क करता है, वह रूहानी बुलन्दी से गिर पड़ता है, फिर नफ़्सानी ख़्वाहिशात (परिंदे) उसे नोच-नोच कर खा जाती हैं और गुमराह करने वाली हवाएं उसे हलाकत की गहरी खाई में फेंक देती हैं जहाँ से बच निकलने की कोई राह नहीं।
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