कुरान - 22:31 सूरह अल-हज् अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

31
حُنَفَآءَ لِلَّهِ غَيۡرَ مُشۡرِكِينَ بِهِۦۚ وَمَن يُشۡرِكۡ بِٱللَّهِ فَكَأَنَّمَا خَرَّ مِنَ ٱلسَّمَآءِ فَتَخۡطَفُهُ ٱلطَّيۡرُ أَوۡ تَهۡوِي بِهِ ٱلرِّيحُ فِي مَكَانٖ سَحِيقٖ

Transliteration: (Hunafaaa'a lillaahi ghaira mushrikeena bih; wa mai yushrik billaahi faka annamaa kharra minas samaaa'i fatakh tafuhut tairu aw tahwee bihir reehu bee makaanin saheeq)

31. अल्लाह के लिए यकसूं (हुनफ़ा) होते हुए, उसके साथ किसी को शरीक न ठहराते हुए [72]; और जो शख़्स अल्लाह के साथ किसी को शरीक ठहराता है, तो गोया वह आसमान से गिर पड़ा, फिर परिंदे उसे उचक ले जाएं या तेज़ हवा उसे किसी बहुत दूर की खाई में फेंक दे [73] ! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हज् आयत 31 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हज्ज — आयत 31 की तफ़सीर

"अल्लाह के लिए यकसूं (हुनफ़ा) होते हुए, उसके साथ किसी को शरीक न ठहराते हुए [72]; और जो शख़्स अल्लाह के साथ किसी को शरीक ठहराता है, तो गोया वह आसमान से गिर पड़ा, फिर परिंदे उसे उचक ले जाएं या तेज़ हवा उसे किसी बहुत दूर की खाई में फेंक दे [73] !"

[72] ख़ालिस तौहीद की अहमियत

ईमान की मिसाल ख़ालिस सोने या खालिस दूध की तरह है जिसमें कोई मिलावट न हो। जब तक दिल में ख़ालिस तौहीद न हो और शिर्क की ज़रा सी भी आमेज़िश हो, तो कोई अमल अल्लाह की बारगाह में क़ुबूल नहीं होता।

[73] मुशरिक की हलाकत की तमसील

अल्लाह तआला ने मुशरिक की तबाही की अज़ीम मिसाल बयान फ़रमाई:

  • ईमान बुलन्द आसमान की तरह है।

  • शिर्क आसमान से गिरकर हलाक हो जाने की तरह है।

  • जो इंसान शिर्क करता है, वह रूहानी बुलन्दी से गिर पड़ता है, फिर नफ़्सानी ख़्वाहिशात (परिंदे) उसे नोच-नोच कर खा जाती हैं और गुमराह करने वाली हवाएं उसे हलाकत की गहरी खाई में फेंक देती हैं जहाँ से बच निकलने की कोई राह नहीं।

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