कुरान - 22:33 सूरह अल-हज् अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

33
لَكُمۡ فِيهَا مَنَٰفِعُ إِلَىٰٓ أَجَلٖ مُّسَمّٗى ثُمَّ مَحِلُّهَآ إِلَى ٱلۡبَيۡتِ ٱلۡعَتِيقِ

Transliteration: (Lakum feehaa manaafi'u ilaaa ajalim musamman summa mahilluhaaa ilal Baitil 'Ateeq (section 4))

33. तुम्हारे लिए उनमें एक मुक़र्रर वक़्त तक फ़ायदे हैं, फिर उनकी क़ुर्बानी की जगह उस पुराने घर (काबा/हरम) के पास पहुंचना है [75-76] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हज् आयत 33 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हज्ज — आयत 33 की तफ़सीर

"तुम्हारे लिए उनमें एक मुक़र्रर वक़्त तक फ़ायदे हैं, फिर उनकी क़ुर्बानी की जगह उस पुराने घर (काबा/हरम) के पास पहुंचना है [75-76] ।"

[75-76] हदिय्या (क़ुर्बानी के जानवरों) के फ़ायदे और मंज़िल

क़ुर्बानी के जानवरों (हदिय्या) से उनकी क़ुर्बानी के वक़्त तक फ़ायदा उठाना (मसलन दूध पीना, सवारी करना जहाँ ज़रूरत हो) जाइज़ है, बशर्ते कि जानवर को तकलीफ़ न हो। फिर उनकी आख़िरी मंज़िल बैतुल्लाह का हरम शरीफ़ है जहाँ उन्हें अल्लाह की रज़ा के लिए पेश और ज़ब्ह किया जाता है। यह दुनियावी फ़ायदे को रूहानी मक़सद से जोड़ने की बेहतरीन मिसाल है।

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