Transliteration: (Allazeena izaa zukiral laahu wajilat quloobuhum wassaabireena 'alaa maaa asaabahum walmuqeemis Salaati wa mimmaa razaqnaahum yunfiqoon)
"जिनका हाल यह है कि जब अल्लाह का ज़िक्र किया जाता है [79], तो उनके दिल कांप उठते हैं, और जो कुछ मुसीबत उन पर आए उस पर सब्र करने वाले हैं, और नमाज़ क़ायम करने वाले हैं, और जो कुछ हमने उन्हें दिया है उसमें से (अल्लाह की राह में) ख़र्च करते हैं [80] ।"
सच्चे मोमिनीन की सिफ़त यह है कि जब अल्लाह की अज़मत और उसके अहकाम का ज़िक्र होता है, तो उनके दिल ख़ौफ़े ख़ुदा और अज़मते इलाही से लरज़ उठते हैं। वे क़ुरआन की तिलावत और नसीहत को संजीदगी से सुनते हैं और अपनी इस्लाह करते हैं।
अल्लाह की राह में ख़र्च करने में ज़कात, सदक़ात, क़ुर्बानी, मसाजिद की तामीर और अपने बाल-बच्चों व रिश्तेदारों की कफ़ालत सब शामिल हैं। 'जो कुछ हमने दिया है उसमें से ख़र्च करते हैं' फ़रमाकर मोअतदिल रहने की तालीम दी गई—यानी सब कुछ ख़त्म न कर दें बल्कि अपनी हैसियत के मुताबिक़ ख़र्च करें।
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