Transliteration: (Zaalika wa mai yu'azzim sha'aaa'iral laahi fa innahaa min taqwal quloob)
"यह (बात याद रखो); और जो शख़्स अल्लाह के शआइर (निशानियों व इबादतों) की ताज़ीम करता है, तो बेशक यह दिलों के तक़वे में से है [74] ।"
शआइरुल्लाह से मुराद वे तमाम मुक़द्दस मक़ामात, अश्या और निशानियां हैं जिन्हें अल्लाह की तरफ़ ख़ास निस्बत हासिल है:
ज़ाहिरी तक़्वा: नमाज़, रोज़ा और ज़ाहिरी आमाल की पाबंदी।
बातिनी (दिलों का) तक़्वा: अल्लाह के महबूबों, मुक़द्दस मक़ामात (सफ़ा, मरवा, काबा) और उनके आसार की दिल से ताज़ीम करना।
तफ़सीर रूहुल बयान में है कि अल्लाह के नेक बन्दों के मज़ार शरीफ़ और उनके इस्तेमाल शुदा आसार भी शआइरुल्लाह में दाख़िल हैं। उनकी ताज़ीम दिल के सच्चे तक़्वे की अलामत है।
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