कुरान - 22:41 सूरह अल-हज् अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

41
ٱلَّذِينَ إِن مَّكَّنَّـٰهُمۡ فِي ٱلۡأَرۡضِ أَقَامُواْ ٱلصَّلَوٰةَ وَءَاتَوُاْ ٱلزَّكَوٰةَ وَأَمَرُواْ بِٱلۡمَعۡرُوفِ وَنَهَوۡاْ عَنِ ٱلۡمُنكَرِۗ وَلِلَّهِ عَٰقِبَةُ ٱلۡأُمُورِ

Transliteration: (Allazeena im makkan naahum fil ardi aqaamus Salaata wa aatawuz Zakaata wa amaroo bilma'roofi wa nahaw 'anil munkar; wa lillaahi 'aaqibatul umoor)

41. (ये अहले ईमान) वे लोग हैं कि अगर हम उन्हें ज़मीन में इक़्तिदार (हुकूमत) बख़्शें [94], तो वे नमाज़ क़ायम करेंगे [95], और ज़कात अदा करेंगे, और भलाई का हुक्म देंगे और बुराई से रोकेंगे [96]; और तमाम कामों का अंजाम अल्लाह ही के इख़्तियार में है [97] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हज् आयत 41 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हज्ज — आयत 41 की तफ़सीर

"(ये अहले ईमान) वे लोग हैं कि अगर हम उन्हें ज़मीन में इक़्तिदार (हुकूमत) बख़्शें [94], तो वे नमाज़ क़ायम करेंगे [95], और ज़कात अदा करेंगे, और भलाई का हुक्म देंगे और बुराई से रोकेंगे [96]; और तमाम कामों का अंजाम अल्लाह ही के इख़्तियार में है [97] ।"

[94-95] इस्लामी हुकूमत और मोमिनीन का तर्ज़े अमल

जब सच्चे मोमिनीन को ज़मीन में इक़्तिदार और हुकूमत नसीब होती है, तो वे दुनियावी ऐशो-इशरत या ज़ुल्मो-सितम के पीछे नहीं भागते, बल्कि उनका मक़सद अल्लाह के दीन को सरबुलन्द करना होता है:

  • नमाज़ क़ायम करना: मस्जिदों को आबाद करना और बा-जमाअत नमाज़ का निज़ाम चलाना।

  • ज़कात अदा करना: बैतुल-माल के ज़रिये ग़रीबों, मिस्कीनों और मोहताजों की इमदाद करना।

दुनियावी बादशाहों की जंगें तबाही और लूटमार लाती हैं, जबकि मोमिनीन की हुकूमत अम्बिया-ए-किराम की सुन्नत पर मबनी होती है जो अदल और रूहानी इस्लाह क़ायम करती है।

[96] अम्र बिल-मअरूफ़ व नहीं अनिल-मुनकर

भलाई का हुक्म देना और बुराई से रोकना हर मुसलमान की ज़िम्मेदारी है, जो अपनी-अपनी हैसियत के मुताबिक़ अदा की जाती है:

  • हुक्मरान: क़ानून और ताक़त के ज़रिये बुराइयों का ख़ातमा करें।

  • उलमा-ए-किराम: अपने इल्म, नसीहत और वाअज़ के ज़रिये लोगों की रहनुमाई करें।

  • आम मुसलमान: बुराई को दिल से बुरा जानें और अपनी ज़बान व अमल से अच्छाई फैलाएं।

इस आयत का बेहतरीन मिस्दाक़ ख़ुल्फ़ा-ए-राशिदीन की हुकूमत है जिन्होंने इस आयत पर मुकम्मल अमल करके अदल व इंसाफ़ की बे-मिसाल रियासत क़ायम फ़रमाई।

[97] उमूर का आख़िरी अंजाम अल्लाह के हाथ में

हर काम का आख़िरी नतीजा और फ़ैसला सिर्फ़ अल्लाह ही के इख़्तियार में है। जब मोमिनीन खुलूस के साथ दीन की ख़िदमत करते हैं, तो अल्लाह की ग़ैबी नुसरत उनके साथ होती है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now