कुरान - 22:50 सूरह अल-हज् अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

50
فَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّـٰلِحَٰتِ لَهُم مَّغۡفِرَةٞ وَرِزۡقٞ كَرِيمٞ

Transliteration: (Fallazeena aamanoo wa 'amilus saalihaati lahum maghfiratunw wa rizqun kareem)

50. पस जो लोग ईमान लाए और उन्होंने नेक आमाल किए, उनके लिए मग़फ़िरत (बख़्शिश) है और बा-इज़्ज़त रोज़ी (जन्नत) है [110] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हज् आयत 50 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हज्ज — आयत 50 की तफ़सीर

"पस जो लोग ईमान लाए और उन्होंने नेक आमाल किए, उनके लिए मग़फ़िरत (बख़्शिश) है और बा-इज़्ज़त रोज़ी (जन्नत) है [110] ।"

[110] मग़फ़िरत और रिज़्के करीम की बशारत

ईमान और नेक आमाल वालों के लिए दो अज़ीम इनाम हैं:

  • मग़फ़िरत: उनके गुनाहों को अल्लाह अपनी रहमत से माफ़ फ़रमा देगा।

  • रिज़्के करीम: जन्नत की बा-इज़्ज़त और दायमी नेमतें, जहाँ अल्लाह का दीदार और हुज़ूर ﷺ की शफ़ाअत हासिल होगी।

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