कुरान - 22:48 सूरह अल-हज् अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

48
وَكَأَيِّن مِّن قَرۡيَةٍ أَمۡلَيۡتُ لَهَا وَهِيَ ظَالِمَةٞ ثُمَّ أَخَذۡتُهَا وَإِلَيَّ ٱلۡمَصِيرُ

Transliteration: (Wa ka ayyim min qaryatin amlaitu lahaa wa hiya zaalimatun summa akhaztuhaa wa ilaiyal maseer (section 6))

48. और कितनी ही बस्तियाँ ऐसी थीं जिन्हें मैंने ढील दी जबकि वे ज़ालिम थीं [107], फिर मैंने उन्हें पकड़ लिया [108]; और मेरी ही तरफ़ सबको लौट कर आना है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हज् आयत 48 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हज्ज — आयत 48 की तफ़सीर

"और कितनी ही बस्तियाँ ऐसी थीं जिन्हें मैंने ढील दी जबकि वे ज़ालिम थीं [107], फिर मैंने उन्हें पकड़ लिया [108]; और मेरी ही तरफ़ सबको लौट कर आना है।"

[107] ज़ालिमों को मोहलत (इमहाल) देना

अल्लाह तआला अपनी हिकमत के तहत ज़ालिमों को फ़ौरन नहीं पकड़ता बल्कि उन्हें तौबा और संभलने की मोहलत देता है। लेकिन जब वे अपनी सरकशी में पक्के हो जाते हैं, तो अल्लाह की पकड़ अचानक आ पहुंचती है।

[108] क़हरे इलाही और बारगाहे ख़ुदावन्दी में वापसी

अल्लाह की पकड़ से कोई बचकर नहीं भाग सकता। अगर कोई दुनियावी सज़ा से बच भी जाए, तो आख़िरत में सबको अल्लाह ही की बारगाह में पेश होना है जहाँ हर ज़ुल्म का पूरा-पूरा बदला दिया जाएगा।

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