कुरान - 22:51 सूरह अल-हज् अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

51
وَٱلَّذِينَ سَعَوۡاْ فِيٓ ءَايَٰتِنَا مُعَٰجِزِينَ أُوْلَـٰٓئِكَ أَصۡحَٰبُ ٱلۡجَحِيمِ

Transliteration: (Wallazeena sa'aw feee Aayaatinaa mu'aajizeena ulaaa ika As-haabul jaheem)

51. और जिन लोगों ने हमारी आयतों को आजिज़ करने (हराने) की कोशिश की, वही लोग भड़कती आग (जहन्नम) वाले हैं [111] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हज् आयत 51 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हज्ज — आयत 51 की तफ़सीर

"और जिन लोगों ने हमारी आयतों को आजिज़ करने (हराने) की कोशिश की, वही लोग भड़कती आग (जहन्नम) वाले हैं [111] ।"

[111] अहकामे इलाही के मुक़ाबले में सरकशी का अंजाम

जो लोग अल्लाह की आयतों, उसके दीन और उसके रसूल ﷺ के मुक़ाबले में मुआनदा (दुश्मनी) और तकब्बुर करते हैं और यह समझते हैं कि वे हक़ को दबा देंगे, वे कभी कामयाब नहीं हो सकते। उनका ठिकाना जहन्नम की भड़कती हुई आग (असहाबुल जहीम) है जहाँ वे हमेशा ज़िल्लत का अज़ाब भुगतेंगे।

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