Transliteration: (Liyaj'ala maa yulqish Shaitaanu fitnatal lillazeena fee quloobihim maradunw walqaasiyati quloobuhum; wa innaz zaalimeena lafee shiqaaqim ba'eed)
"ताकि वह उस (वसवसे) को जिसे शैतान डालता है उन लोगों के लिए आज़माइश बना दे जिनके दिलों में बीमारी (निफ़ाक़) है और जिनके दिल सख़्त हैं [115]; और बेशक ज़ालिम लोग दूर की दुश्मनी में पड़े हुए हैं [116] ।"
शैतानी वसवसे मुनाफ़िक़ों और कुफ़्फ़ार के लिए आज़माइश बन जाते हैं। जिनके दिलों में निफ़ाक़ की बीमारी है या जिनके दिल कुफ़्र की वजह से पत्थर हो चुके हैं, वे इन वसवसों को पकड़ कर शक और शुबहात में मुब्तला हो जाते हैं और हक़ से दूर हो जाते हैं।
ये ज़ालिम लोग हक़ से इतनी दूर निकल चुके हैं कि उनकी दुश्मनी और ज़िद की कोई हद नहीं रही। वे हर मौक़े पर हक़ का मुक़ाबला करने के बहाने तलाश करते हैं।
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