कुरान - 22:55 सूरह अल-हज् अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

55
وَلَا يَزَالُ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ فِي مِرۡيَةٖ مِّنۡهُ حَتَّىٰ تَأۡتِيَهُمُ ٱلسَّاعَةُ بَغۡتَةً أَوۡ يَأۡتِيَهُمۡ عَذَابُ يَوۡمٍ عَقِيمٍ

Transliteration: (Wa laa yazaalul lazeena kafaroo fee miryatim minhu hattaa taatiyahumus Saa'atu baghtatan aw yaatiyahum 'azaabu Yawmin 'aqeem)

55. और काफ़िर लोग बराबर इसकी तरफ़ से शक में पड़े रहेंगे यहाँ तक कि क़ियामत उन पर अचानक आ पहुंचे [119] या उनके पास एक बांझ (अशुभ व मनहूस) दिन का अज़ाब आ जाए। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हज् आयत 55 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हज्ज — आयत 55 की तफ़सीर

"और काफ़िर लोग बराबर इसकी तरफ़ से शक में पड़े रहेंगे यहाँ तक कि क़ियामत उन पर अचानक आ पहुंचे [119] या उनके पास एक बांझ (अशुभ व मनहूस) दिन का अज़ाब आ जाए।"

[119] दायमी शक और ना-गहानी अज़ाब

मुनकिरीन अपनी ज़िद और हठधर्मी की वजह से हमेशा क़ुरआन के बारे में शक में पड़े रहेंगे, यहाँ तक कि अचानक मौत या क़ियामत आ पहुंचेगी जब तौबा का दरवाज़ा बंद हो चुका होगा। 'बांझ दिन' (यौमुन अक़ीम) से मुराद जंग-ए-बद्र का दिन या क़ियामत का दिन है, जिसमें काफ़िरों के लिए कोई भलाई या राहत पैदा न होगी बल्कि सिर्फ़ हलाकत ही हलाकत होगी।

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