कुरान - 22:57 सूरह अल-हज् अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

57
وَٱلَّذِينَ كَفَرُواْ وَكَذَّبُواْ بِـَٔايَٰتِنَا فَأُوْلَـٰٓئِكَ لَهُمۡ عَذَابٞ مُّهِينٞ

Transliteration: (Wallazeena kafaroo wa kazzaboo bi Aayaatinaa fa ulaaa'ika lahum 'azaabum muheen (section 7))

57. और जिन लोगों ने कुफ़्र किया और हमारी आयतों को झुठलाया, तो ऐसे ही लोगों के लिए रुसवाकुन (ज़लील करने वाला) अज़ाब होगा [122] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हज् आयत 57 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हज्ज — आयत 57 की तफ़सीर

"और जिन लोगों ने कुफ़्र किया और हमारी आयतों को झुठलाया, तो ऐसे ही लोगों के लिए रुसवाकुन (ज़लील करने वाला) अज़ाब होगा [122] ।"

[122] काफ़िरों के लिए रुसवाकुन अज़ाब

काफ़िरों के लिए सिर्फ़ जिस्मानी अज़ाब ही नहीं होगा बल्कि भारी रुसवाई और ज़िल्लत भी होगी। गुनाहगार मोमिन अगर जहन्नम में जाएंगे भी, तो उन्हें इस तरह ज़लील और रुस्वा नहीं किया जाएगा; उनकी सज़ा काफ़िरों की तरह अहले महशर के सामने रुसवाई वाली नहीं होगी।

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