Transliteration: (Wallazeena haajaroo fee sabeelil laahi summa qutilooo aw maatoo la yarzuqan nahumul laahu rizqan hasanaa; wa innal laaha la Huwa khairur raaziqeen)
"और जिन लोगों ने अल्लाह की राह में हिजरत की [123], फिर वे (शहीद करके) क़त्ल कर दिए गए या अपनी मौत मर गए, तो अल्लाह उन्हें ज़रूर बेहतरीन रिज़्क़ अता फ़रमाएगा; और बेशक अल्लाह ही सबसे बेहतरीन रिज़्क़ देने वाला है [124] ।"
जिन्होंने अल्लाह की रज़ा के लिए अपने घर-बार और वतन को छोड़ा, चाहे वे मैदान-ए-जंग में शहीद हुए हों या अपनी क़ुदरती मौत मरे हों, अल्लाह के नज़दीक दोनों का अज्र अज़ीम है। अल्लाह तआला उन्हें आला तरीन रिज़्क़ (जन्नती नेमतें) अता फ़रमाएगा।
अल्लाह का रिज़्क़ बे-मिसाल है क्योंकि वह न ख़त्म होता है, न उसमें कोई एहसान जताना होता है, और वह रूह और जिस्म दोनों को दायमी सुकून बख़्शता है।
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