कुरान - 22:58 सूरह अल-हज् अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

58
وَٱلَّذِينَ هَاجَرُواْ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِ ثُمَّ قُتِلُوٓاْ أَوۡ مَاتُواْ لَيَرۡزُقَنَّهُمُ ٱللَّهُ رِزۡقًا حَسَنٗاۚ وَإِنَّ ٱللَّهَ لَهُوَ خَيۡرُ ٱلرَّـٰزِقِينَ

Transliteration: (Wallazeena haajaroo fee sabeelil laahi summa qutilooo aw maatoo la yarzuqan nahumul laahu rizqan hasanaa; wa innal laaha la Huwa khairur raaziqeen)

58. और जिन लोगों ने अल्लाह की राह में हिजरत की [123], फिर वे (शहीद करके) क़त्ल कर दिए गए या अपनी मौत मर गए, तो अल्लाह उन्हें ज़रूर बेहतरीन रिज़्क़ अता फ़रमाएगा; और बेशक अल्लाह ही सबसे बेहतरीन रिज़्क़ देने वाला है [124] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हज् आयत 58 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हज्ज — आयत 58 की तफ़सीर

"और जिन लोगों ने अल्लाह की राह में हिजरत की [123], फिर वे (शहीद करके) क़त्ल कर दिए गए या अपनी मौत मर गए, तो अल्लाह उन्हें ज़रूर बेहतरीन रिज़्क़ अता फ़रमाएगा; और बेशक अल्लाह ही सबसे बेहतरीन रिज़्क़ देने वाला है [124] ।"

[123] मुहाजिरीने फ़ी सबी लिल्लाह का मर्तबा

जिन्होंने अल्लाह की रज़ा के लिए अपने घर-बार और वतन को छोड़ा, चाहे वे मैदान-ए-जंग में शहीद हुए हों या अपनी क़ुदरती मौत मरे हों, अल्लाह के नज़दीक दोनों का अज्र अज़ीम है। अल्लाह तआला उन्हें आला तरीन रिज़्क़ (जन्नती नेमतें) अता फ़रमाएगा।

[124] ख़ैरुर-राज़िक़ीन (सबसे बेहतरीन रिज़्क़ देने वाला)

अल्लाह का रिज़्क़ बे-मिसाल है क्योंकि वह न ख़त्म होता है, न उसमें कोई एहसान जताना होता है, और वह रूह और जिस्म दोनों को दायमी सुकून बख़्शता है।

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