कुरान - 22:54 सूरह अल-हज् अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

54
وَلِيَعۡلَمَ ٱلَّذِينَ أُوتُواْ ٱلۡعِلۡمَ أَنَّهُ ٱلۡحَقُّ مِن رَّبِّكَ فَيُؤۡمِنُواْ بِهِۦ فَتُخۡبِتَ لَهُۥ قُلُوبُهُمۡۗ وَإِنَّ ٱللَّهَ لَهَادِ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓاْ إِلَىٰ صِرَٰطٖ مُّسۡتَقِيمٖ

Transliteration: (Wa liya'lamal lazeena ootul 'ilma annahul haqqu mir Rabbika fa yu'minoo bihee fatukhbita lahoo quloobuhum; wa innal laaha lahaadil lazeena aamanoo ilaa Siraatim Mustaqeem)

54. और ताकि वे लोग जिन्हें इल्म दिया गया है यह जान लें कि यह (क़ुरआन) आपके रब की तरफ़ से सरासर हक़ है, तो वे इस पर ईमान ले आएं और उनके दिल इसके आगे झुक जाएं [117]; और बेशक अल्लाह ईमान वालों को सीधे रास्ते की तरफ़ हिदायत फ़रमाने वाला है [118] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हज् आयत 54 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हज्ज — आयत 54 की तफ़सीर

"और ताकि वे लोग जिन्हें इल्म दिया गया है यह जान लें कि यह (क़ुरआन) आपके रब की तरफ़ से सरासर हक़ है, तो वे इस पर ईमान ले आएं और उनके दिल इसके आगे झुक जाएं [117]; और बेशक अल्लाह ईमान वालों को सीधे रास्ते की तरफ़ हिदायत फ़रमाने वाला है [118] ।"

[117] अहले इल्म का यक़ीन और ख़ुशूअ

सच्चे अहले इल्म शैतान के वसवसों के मिटने और वह्य के ग़लबा पाने को देखकर और ज़्यादा यक़ीन हासिल करते हैं कि यह क़ुरआन बरहक़ है। उनके दिल अल्लाह की अज़मत के आगे झुक जाते हैं और उनका ईमान और पुख़्ता हो जाता है।

[118] सिराते मुस्तक़ीम की हिदायत

अल्लाह तआला ईमान वालों को दुनिया में नेक आमाल की तौफ़ीक़ देता है और आख़िरत में जन्नत की तरफ़ सीधी राह दिखाता है।

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