कुरान - 22:74 सूरह अल-हज् अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

74
مَا قَدَرُواْ ٱللَّهَ حَقَّ قَدۡرِهِۦٓۚ إِنَّ ٱللَّهَ لَقَوِيٌّ عَزِيزٌ

Transliteration: (Maa qadrul laaha haqqa qadrih; innal laaha la Qawiyyun 'Azeez)

74. उन्होंने अल्लाह की वैसी क़द्र न पहचानी जैसी उसकी क़द्र पहचानने का हक़ था [152]; बेशक अल्लाह बड़ी क़ुव्वत वाला, बड़ा ज़बरदस्त है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हज् आयत 74 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हज्ज — आयत 74 की तफ़सीर

"उन्होंने अल्लाह की वैसी क़द्र न पहचानी जैसी उसकी क़द्र पहचानने का हक़ था [152]; बेशक अल्लाह बड़ी क़ुव्वत वाला, बड़ा ज़बरदस्त है।"

[152] क़ुदरत-ए-इलाही की ना-क़द्री

मुशरिकीन ने अल्लाह की अज़मत और बे-पायां क़ुदरत को न पहचाना। उन्होंने समझा कि अल्लाह अकेला इस कायनात का निज़ाम नहीं चला सकता, इसलिए उन्होंने उसके शरीक और मददगार तराश लिए।

इसकी मिसाल ऐसी है जैसे कोई देहाती सत्तर डब्बों वाली रेलगाड़ी देखकर कहे कि एक इंजन इसे कैसे खींच सकता है, क्योंकि वह इंजन की ताक़त से बे-ख़बर है। इसी तरह मुशरिक कायनात को देखकर अल्लाह की ला-महदूद क़ुदरत को न समझ सके। अल्लाह तआला तमाम जहानों को अकेले पैदा करने और पालने पर क़ादिर है और उसे किसी की इमदाद की हाजत नहीं।

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