कुरान - 22:72 सूरह अल-हज् अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

72
وَإِذَا تُتۡلَىٰ عَلَيۡهِمۡ ءَايَٰتُنَا بَيِّنَٰتٖ تَعۡرِفُ فِي وُجُوهِ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ ٱلۡمُنكَرَۖ يَكَادُونَ يَسۡطُونَ بِٱلَّذِينَ يَتۡلُونَ عَلَيۡهِمۡ ءَايَٰتِنَاۗ قُلۡ أَفَأُنَبِّئُكُم بِشَرّٖ مِّن ذَٰلِكُمُۚ ٱلنَّارُ وَعَدَهَا ٱللَّهُ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْۖ وَبِئۡسَ ٱلۡمَصِيرُ

Transliteration: (Wa izaa tutlaa 'alaihim Aayaatunaa baiyinaatin ta'rifu fee wujoohil lazeena kafarul munkara yakaadoona yastoona bil lazeena yatloona 'alaihim Aayaatinaa; qul afa unab bi'ukum bisharrim min zaalikum; an Naaru wa 'adahal laahul lazeena kafaroo wa bi'sal maseer (section 9))

72. और जब उनके सामने हमारी वाज़ेह आयतें पढ़ी जाती हैं, तो आप काफ़िरों के चेहरों पर नापसंदी और ग़ुस्से के आसार पहचान लेंगे [145]; क़रीब होते हैं कि वे उन लोगों पर टूट पड़ें जो उन्हें हमारी आयतें पढ़कर सुनाते हैं! कह दीजिए, 'क्या मैं तुम्हें इससे भी ज़्यादा बुरी चीज़ की ख़बर दूँ [146]? वह आग (जहन्नम) है जिसका अल्लाह ने काफ़िरों से वादा कर रखा है; और वह कितना बुरा ठिकाना है [147] !' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हज् आयत 72 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हज्ज — आयत 72 की तफ़सीर

"और जब उनके सामने हमारी वाज़ेह आयतें पढ़ी जाती हैं, तो आप काफ़िरों के चेहरों पर नापसंदी और ग़ुस्से के आसार पहचान लेंगे [145]; क़रीब होते हैं कि वे उन लोगों पर टूट पड़ें जो उन्हें हमारी आयतें पढ़कर सुनाते हैं! कह दीजिए, 'क्या मैं तुम्हें इससे भी ज़्यादा बुरी चीज़ की ख़बर दूँ [146]? वह आग (जहन्नम) है जिसका अल्लाह ने काफ़िरों से वादा कर रखा है; और वह कितना बुरा ठिकाना है [147] !'"

[145] दिल के कुफ़्र का चेहरे पर इज़हार

चेहरा दिल का आईना होता है। जब काफ़िर क़ुरआन की आयतें सुनते हैं, तो उनके चेहरों पर ग़ुस्सा, नफ़रत और तअफ़्फ़ुन छा जाता है और वे तिलावत करने वाले मुसलमानों पर हमला करने के लिए तैयार हो जाते हैं। इसके बरअक्स मोमिनीन जब अल्लाह और उसके रसूल ﷺ का ज़िक्र सुनते हैं, तो उनके चेहरे नूर और ख़ुशी से चमक उठते हैं।

[146] अज़ाबे जहन्नम की ख़ौफ़नाक ख़बर

काफ़िर क़ुरआन की तिलावत सुनकर आग-बबूला होते हैं, मगर उन्हें मालूम होना चाहिए कि इससे कहीं ज़्यादा भयानक और बदतरीन चीज़ जहन्नम की दहकती हुई आग है जहाँ उन्हें हमेशा रहना है।

[147] जहन्नम का वाअदा ख़ास कुफ़्फ़ार के लिए

जहन्नम की दायमी आग का क़तई वाअदा ख़ास उन लोगों के लिए है जो कुफ़्र पर मरेंगे। गुनाहगार मोमिनों के लिए अल्लाह की रहमत और मग़फ़िरत का दरवाज़ा खुला है।

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