Transliteration: (Wa ya'budoona min doonil laahi maa lam yunazzil bihee sultaananw wa maa laisa lahum bihee 'ilm; wa maa lizzaalimeena min naseer)
"और वे अल्लाह के सिवा ऐसी चीज़ों की पूजा करते हैं जिसकी उसने कोई सनद (दलील) नाज़िल नहीं की और जिसके बारे में उन्हें खुद कोई इल्म नहीं [143]; और ज़ालिमों का कोई मददगार न होगा [144] ।"
मुशरिकीन जिन बुतों की पूजा करते थे, उनके पास न तो कोई आसमानी किताब की दलील (सनद) थी और न ही कोई अक़ली सबूत। हक़ीक़ी इल्म वह है जो वाक़ेअ के मुताबिक़ हो; झूठे ख़्यालात और वहम को इल्म नहीं कहा जाता बल्कि वह जहालत है।
क़ियामत के दिन शिर्क करने वाले ज़ालिमों का कोई मददगार, हामी या शफ़ीअ न होगा। इसके बरअक्स अहले ईमान के लिए अल्लाह के फ़ज़्ल से हुज़ूर अकरम ﷺ और औलिया-ए-किराम की शफ़ाअत नसीब होगी।
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