कुरान - 15:30 सूरह अल-हिज्र अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

30
فَسَجَدَ ٱلۡمَلَـٰٓئِكَةُ كُلُّهُمۡ أَجۡمَعُونَ

Transliteration: (Fasajadal malaaa'ikatu kulluhum ajma'oon)

तो तमाम फ़रिश्तों ने सजदा किया एक साथ [38] मिलकर। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हिज्र आयत 30 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हिज्र – आयत 30 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

तो तमाम फ़रिश्तों ने सजदा किया एक साथ [38] मिलकर।

[38] तमाम फ़रिश्तों का ब-यक-वक़्त सजदा

लफ़्ज़ 'तमाम' से मालूम हुआ कि कोई भी फ़रिश्ता पीछे नहीं रहा, और 'एक साथ' से साबित हुआ कि सबने अलग-अलग नहीं बल्कि एक ही वक़्त में मिलकर सजदा किया। साहिबे रूहुल बयान ने फ़रमाया कि हक़ीक़त में यह सजदा उस 'नूर-ए-मुहम्मदी ﷺ' को था जो हज़रत आदम की पेशानी में चमक रहा था।

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