Transliteration: (Laa yamas suhum feehaa nasabunw wa maa hum minhaa bimukhrajeen)
न उन्हें वहाँ कोई तकलीफ़ (थकान) पहुँचेगी और न वे वहाँ से निकाले जाएँगे [57]।
जब जन्नतियों को जज़ा के तौर पर जन्नत अता कर दी जाएगी, तो वे कभी वहाँ से निकाले नहीं जाएँगे। हज़रत आदम अलैहिस्सलाम का जन्नत में क़ियाम तालीम व तर्बियत के लिए था ताकि ज़मीन पर आबादी बसा सकें; और हमारे हुज़ूर अकरम ﷺ का शबे-मेअराज जन्नत में जाना मुशाहिदा फ़रमाने के लिए था। जज़ा के तौर पर जो दाख़िल होगा, वह हमेशा-हमेशा रहेगा।
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