कुरान - 15:48 सूरह अल-हिज्र अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

48
لَا يَمَسُّهُمۡ فِيهَا نَصَبٞ وَمَا هُم مِّنۡهَا بِمُخۡرَجِينَ

Transliteration: (Laa yamas suhum feehaa nasabunw wa maa hum minhaa bimukhrajeen)

न उन्हें वहाँ कोई तकलीफ़ (थकान) पहुँचेगी और न वे वहाँ से निकाले जाएँगे [57]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हिज्र आयत 48 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हिज्र – आयत 48 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

न उन्हें वहाँ कोई तकलीफ़ (थकान) पहुँचेगी और न वे वहाँ से निकाले जाएँगे [57]।

[57] जन्नत की हमेशगी और नेमतों का सुकून

जब जन्नतियों को जज़ा के तौर पर जन्नत अता कर दी जाएगी, तो वे कभी वहाँ से निकाले नहीं जाएँगे। हज़रत आदम अलैहिस्सलाम का जन्नत में क़ियाम तालीम व तर्बियत के लिए था ताकि ज़मीन पर आबादी बसा सकें; और हमारे हुज़ूर अकरम ﷺ का शबे-मेअराज जन्नत में जाना मुशाहिदा फ़रमाने के लिए था। जज़ा के तौर पर जो दाख़िल होगा, वह हमेशा-हमेशा रहेगा।

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