कुरान - 15:50 सूरह अल-हिज्र अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

50
وَأَنَّ عَذَابِي هُوَ ٱلۡعَذَابُ ٱلۡأَلِيمُ

Transliteration: (Wa anna 'azaabee huwal 'azaabul aleem)

और यह कि मेरा ही अज़ाब दर्दनाक अज़ाब है [58]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हिज्र आयत 50 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हिज्र – आयत 50 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

और यह कि मेरा ही अज़ाब दर्दनाक अज़ाब है [58]।

[58] शाने-नुज़ूल और ख़ौफ़ व रजा का तवाज़ुन

शाने-नुज़ूल: एक बार हुज़ूर अकरम ﷺ सहाबा-ए-किराम की एक जमाअत के पास से गुज़रे जो आपस में हँस रहे थे। आप ﷺ ने फ़रमाया कि तुम हँसते हो? इस पर सहाबा ख़ौफ़ज़दा हो गए। तब यह आयत नाज़िल हुई (तफ़सीरे रूहुल बयान)। इससे मालूम हुआ कि ईमान की बुनियाद अल्लाह की रहमत की उम्मीद (रजा) और उसके अज़ाब के डर (ख़ौफ़) के तवाज़ुन पर क़ायम है।

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