कुरान - 15:51 सूरह अल-हिज्र अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

51
وَنَبِّئۡهُمۡ عَن ضَيۡفِ إِبۡرَٰهِيمَ

Transliteration: (Wa nabbi'hum 'an daifi Ibraaheem)

और उन्हें इब्राहीम के मेहमानों का अहवाल सुनाओ [59]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हिज्र आयत 51 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हिज्र – आयत 51 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

और उन्हें इब्राहीम के मेहमानों का अहवाल सुनाओ [59]।

[59.1] मेहमानों की पहचान

वे हज़रत जिब्रील अलैहिस्सलाम और उनके हमराह चन्द फ़रिश्ते थे। वे हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम के पास इन्सानी मेहमानों की शक्ल में हज़रत इस्हाक़ अलैहिस्सलाम की विलादत की बशारत देने आए थे। शुरू में हज़रत इब्राहीम ने उन्हें नहीं पहचाना, क्योंकि वे आम मुसाफ़िरों की शक्ल में थे।

[59.2] महमान-नवाज़ी और नुबुव्वत के अहकाम

इससे दो बातें मालूम हुईं:

  1. मेहमान-नवाज़ी जान-पहचान पर मौक़ूफ़ नहीं है; अजनबी भी घर आ जाए तो उसकी इज़्ज़त व ख़ातिरदारी करना अम्बिया किराम की सुन्नत है।

  2. अगर फ़रिश्ता वही (आसमानी पैग़ाम) लेकर न आया हो, तो नबी का उसे न पहचानना जाइज़ है। लेकिन वही के वक़्त फ़रिश्ते को पहचानना लाज़मी है, ताकि वही में कोई शुबहा बाक़ी न रहे।

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