कुरान - 15:55 सूरह अल-हिज्र अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

55
قَالُواْ بَشَّرۡنَٰكَ بِٱلۡحَقِّ فَلَا تَكُن مِّنَ ٱلۡقَٰنِطِينَ

Transliteration: (Qaaloo bashsharnaaka bilhaqqi falaa takum minal qaaniteen)

वे बोले, "हमने आपको सच्ची बशारत दी है, तो आप ना-उम्मीद न हों" [64]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हिज्र आयत 55 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हिज्र – आयत 55 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

वे बोले, "हमने आपको सच्ची बशारत दी है, तो आप ना-उम्मीद न हों" [64]।

[64] तसल्ली और इतमीनान

यानी आप दोनों इसी बुढ़ापे की हालत में रहेंगे और अल्लाह आपको बेटा अता फ़रमाएगा। इस आयत का यह मतलब हरगिज़ नहीं कि हज़रत इब्राहीम (मआज़अल्लाह) अल्लाह की रहमत से ना-उम्मीद हो चुके थे; बल्कि यह महज़ एक तसल्ली और हिदायती नसीहत थी — जैसे हज़रत लुक़मान ने अपने बेटे से फ़रमाया था कि "शिर्क न करना", जिसका मतलब यह नहीं था कि बेटा शिर्क कर रहा था।

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