कुरान - 15:54 सूरह अल-हिज्र अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

54
قَالَ أَبَشَّرۡتُمُونِي عَلَىٰٓ أَن مَّسَّنِيَ ٱلۡكِبَرُ فَبِمَ تُبَشِّرُونَ

Transliteration: (Qaala abashshartumoonee 'alaaa am massaniyal kibaru fabima tubashshiroon)

कहा, "क्या तुम मुझे इस पर बशारत देते हो कि मुझे बुढ़ापा आ पहुँचा? अब किस पर बशारत देते हो?" [63]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हिज्र आयत 54 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हिज्र – आयत 54 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

कहा, "क्या तुम मुझे इस पर बशारत देते हो कि मुझे बुढ़ापा आ पहुँचा? अब किस पर बशारत देते हो?" [63]।

[63] तअज्जुब का इज़हार, इनकार नहीं

यानी क्या हम मियाँ-बीवी को दोबारा जवान किया जाएगा, या हम इसी बुढ़ापे की हालत में रहेंगे और हमें बेटा अता होगा? यह सवाल अल्लाह की क़ुदरत के इनकार के तौर पर नहीं था, बल्कि ऐसी अज़ीम नेमत पर तअज्जुब और ख़ुशी का इज़हार था।

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