Transliteration: (Qaala wa mai yaqnatu mir rahmati Rabbiheee illad daaaloon)
कहा, "और अपने रब की रहमत से कौन ना-उम्मीद हो मगर वही जो गुमराह हैं" [65]।
इससे साफ़ हो गया कि हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम का पिछला सवाल मायूसी की वजह से नहीं था बल्कि मोजिज़े की कैफ़ियत जानने के लिए था। अल्लाह की रहमत से ना-उम्मीद होना गुमराहों की ख़स्लत है, और अम्बिया किराम की ज़ात ऐसी तमाम कमज़ोरियों से बहुत बुलन्द व बाला है।
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