कुरान - 15:56 सूरह अल-हिज्र अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

56
قَالَ وَمَن يَقۡنَطُ مِن رَّحۡمَةِ رَبِّهِۦٓ إِلَّا ٱلضَّآلُّونَ

Transliteration: (Qaala wa mai yaqnatu mir rahmati Rabbiheee illad daaaloon)

कहा, "और अपने रब की रहमत से कौन ना-उम्मीद हो मगर वही जो गुमराह हैं" [65]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हिज्र आयत 56 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हिज्र – आयत 56 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

कहा, "और अपने रब की रहमत से कौन ना-उम्मीद हो मगर वही जो गुमराह हैं" [65]।

[65] रहमत-ए-इलाही पर मुकम्मल यक़ीन

इससे साफ़ हो गया कि हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम का पिछला सवाल मायूसी की वजह से नहीं था बल्कि मोजिज़े की कैफ़ियत जानने के लिए था। अल्लाह की रहमत से ना-उम्मीद होना गुमराहों की ख़स्लत है, और अम्बिया किराम की ज़ात ऐसी तमाम कमज़ोरियों से बहुत बुलन्द व बाला है।

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