कुरान - 15:58 सूरह अल-हिज्र अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

58
قَالُوٓاْ إِنَّآ أُرۡسِلۡنَآ إِلَىٰ قَوۡمٖ مُّجۡرِمِينَ

Transliteration: (Qaaloo innaaa ursilnaaa ilaa qawmim mujrimeen)

वे बोले, "हम एक मुजरिम क़ौम की तरफ़ भेजे गए हैं" [67]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हिज्र आयत 58 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हिज्र – आयत 58 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

वे बोले, "हम एक मुजरिम क़ौम की तरफ़ भेजे गए हैं" [67]।

[67] अज़ाब-ए-इलाही का मिशन

फ़रिश्तों ने अर्ज़ किया कि हम क़ौम-ए-लूत पर अज़ाब नाज़िल करने के लिए भेजे गए हैं। इससे मालूम हुआ कि अल्लाह का अज़ाब अचानक और बिना तहक़ीक़ व हुज्जत तमाम किए नहीं आता; जब नाफ़रमानी हद से बढ़ जाती है और तौबा के तमाम दरवाज़े बंद हो जाते हैं, तब अज़ाब का फ़ैसला जारी होता है।

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