Transliteration: (Qaaloo innaaa ursilnaaa ilaa qawmim mujrimeen)
वे बोले, "हम एक मुजरिम क़ौम की तरफ़ भेजे गए हैं" [67]।
फ़रिश्तों ने अर्ज़ किया कि हम क़ौम-ए-लूत पर अज़ाब नाज़िल करने के लिए भेजे गए हैं। इससे मालूम हुआ कि अल्लाह का अज़ाब अचानक और बिना तहक़ीक़ व हुज्जत तमाम किए नहीं आता; जब नाफ़रमानी हद से बढ़ जाती है और तौबा के तमाम दरवाज़े बंद हो जाते हैं, तब अज़ाब का फ़ैसला जारी होता है।
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