Transliteration: (Illaaa Aala Loot; innaa lamunajjoohum ajma'een)
"मगर लूत के घर वाले [68]; हम उन सब को ज़रूर बचा लेंगे [69]।"
इससे मालूम हुआ कि लफ़्ज़ 'आल' में बीवी-बच्चे और ईमानदार पैरवीकार सब शामिल होते हैं। यहाँ हज़रत लूत अलैहिस्सलाम पर ईमान लाने वाले तमाम मोमिनीन मुराद हैं।
हक़ीक़त में नजात देना अल्लाह का काम है, मगर यहाँ फ़रिश्तों ने फ़रमाया: "हम उन्हें बचा लेंगे", क्योंकि वे अल्लाह के हुक्म और इज़्न से ऐसा कर रहे थे। इससे साबित हुआ कि किसी मोमिन का यह कहना: "हुज़ूर अकरम ﷺ हमें अज़ाब से बचाएँगे" या "या रसूलअल्लाह हमारी मदद फ़रमाइए" पूरी तरह जाइज़ है, क्योंकि यह मदद अल्लाह के हुक्म और उसके दिए हुए इख़्तियार से होती है।
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