कुरान - 15:59 सूरह अल-हिज्र अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

59
إِلَّآ ءَالَ لُوطٍ إِنَّا لَمُنَجُّوهُمۡ أَجۡمَعِينَ

Transliteration: (Illaaa Aala Loot; innaa lamunajjoohum ajma'een)

"मगर लूत के घर वाले [68]; हम उन सब को ज़रूर बचा लेंगे [69]।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हिज्र आयत 59 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हिज्र – आयत 59 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"मगर लूत के घर वाले [68]; हम उन सब को ज़रूर बचा लेंगे [69]।"

[68] 'आल' (घर वाले) का मफ़हूम

इससे मालूम हुआ कि लफ़्ज़ 'आल' में बीवी-बच्चे और ईमानदार पैरवीकार सब शामिल होते हैं। यहाँ हज़रत लूत अलैहिस्सलाम पर ईमान लाने वाले तमाम मोमिनीन मुराद हैं।

[69] मक़बूल बन्दों की तरफ़ नजात की निस्बत

हक़ीक़त में नजात देना अल्लाह का काम है, मगर यहाँ फ़रिश्तों ने फ़रमाया: "हम उन्हें बचा लेंगे", क्योंकि वे अल्लाह के हुक्म और इज़्न से ऐसा कर रहे थे। इससे साबित हुआ कि किसी मोमिन का यह कहना: "हुज़ूर अकरम ﷺ हमें अज़ाब से बचाएँगे" या "या रसूलअल्लाह हमारी मदद फ़रमाइए" पूरी तरह जाइज़ है, क्योंकि यह मदद अल्लाह के हुक्म और उसके दिए हुए इख़्तियार से होती है।

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