कुरान - 15:85 सूरह अल-हिज्र अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

85
وَمَا خَلَقۡنَا ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَ وَمَا بَيۡنَهُمَآ إِلَّا بِٱلۡحَقِّۗ وَإِنَّ ٱلسَّاعَةَ لَأٓتِيَةٞۖ فَٱصۡفَحِ ٱلصَّفۡحَ ٱلۡجَمِيلَ

Transliteration: (Wa maa khalaqnas samaawaati wal arda wa maa bainahumaaa illaa bilhaqq; wa innas Saa'ata la aatiyatun fasfahis safhal jameel)

और हमने आसमानों और ज़मीन को और जो कुछ उनके दरमियान है हक़ ही के साथ पैदा फ़रमाया [97]; और बेशक क़यामत आने वाली है [98], तो आप अच्छे तरीक़े से दरगुज़र फ़रमाइए [99]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हिज्र आयत 85 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हिज्र – आयत 85 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

और हमने आसमानों और ज़मीन को और जो कुछ उनके दरमियान है हक़ ही के साथ पैदा फ़रमाया [97]; और बेशक क़यामत आने वाली है [98], तो आप अच्छे तरीक़े से दरगुज़र फ़रमाइए [99]।

[97] कायनात की तख़्लीक़ में हिकमत

अल्लाह तआला ने सारी कायनात को मक़सद और हिकमत के तहत पैदा फ़रमाया है। बुराई और शैतान की पैदाइश में भी हिकमतें पोशीदा हैं ताकि आज़माइश और नेकी का इम्तिहान मुकम्मल हो सके।

[98] क़यामत और हक़ीक़ी हिसाब

क़यामत का आना यक़ीनी है जहाँ हर ज़ुल्म का पूरा बदला और इंसाफ़ क़ायम होगा।

[99] सफ़ह़-ए-जमील (सुन्दर दरगुज़र)

हुज़ूर अकरम ﷺ को हुक्म दिया गया कि मुख़ालिफ़ीन की बदसलूकी पर सब्र और अच्छे तरीक़े से दरगुज़र फ़रमाएँ। बाद में जब जिहाद के अहकाम नाज़िल हुए, तो इन्साफ़ और हक़ की हिफ़ाज़त के लिए तलवार उठाने की इजाज़त हुई।

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