Transliteration: (Tilka Aayaatul laahi natloohaa 'alaika bilhaqq; wa mal laahu yureedu zulmallil 'aalameen)
इस आयत में यह स्पष्ट किया गया है कि क़ुरआन की ये आयतें हक़ और मक़सद के साथ नाज़िल की गई हैं, और अल्लाह अपनी मख़लूक़ पर कभी भी ज़ुल्म नहीं करता। इसका मतलब यह है कि अल्लाह किसी को बिना गुनाह के सज़ा नहीं देता, और नेकी का सिला कभी कम नहीं करता (जैसा कि खज़ाइनुल इरफ़ान में वर्णित है)।
इससे एक अहम अक़ीदा भी मालूम होता है:
काफ़िरों के वे बच्चे जो बचपन में ही मर गए, उन्हें जहन्नम की सज़ा नहीं दी जाएगी, क्योंकि उन्होंने कोई गुनाह किया ही नहीं। और मोमिनों के मरने वाले बच्चे जन्नत में जाएँगे। यह सब अल्लाह की मुकम्मल इंसाफ़ और रहमत का इज़हार है — और यह यक़ीनी है कि अल्लाह किसी जान पर ज़रा भी ज़ुल्म नहीं करता।
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