कुरान - 3:107 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

107
وَأَمَّا ٱلَّذِينَ ٱبۡيَضَّتۡ وُجُوهُهُمۡ فَفِي رَحۡمَةِ ٱللَّهِۖ هُمۡ فِيهَا خَٰلِدُونَ

Transliteration: (Wa ammal lazeena bi yaddat wujoohuhum fafee rahmatil laahi hum feehaa khaalidoon)

लेकिन जिनके चेहरे सफ़ेद हो जाएंगे, वे अल्लाह की रहमत में होंगे, और उसी में हमेशा रहेंगे [239]. (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह आल-इमरान आयत 107 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा आले-इमरान – आयत 107 की तफ़्सीर

 

✅ [239] नेक लोगों के लिए हमेशा की रहमत

इस आयत से हमें यह पता चलता है कि जिनके चेहरे काले होंगे — जैसा कि पिछली आयत में आया — वो हमेशा जहन्नम में रहेंगे, और जिनके चेहरे सफ़ेद होंगे, वे अल्लाह की रहमत यानी जन्नत में सदा रहेंगे। इससे दो अहम बातें सामने आती हैं:

  1. कोई मोमिन चाहे कितना भी गुनहगार क्यों न हो, अगर अल्लाह चाहे, तो उसका चेहरा क़यामत के दिन काला नहीं होगा। चेहरे का काला पड़ना काफ़िरों के लिए ख़ास है।
  2. गुनहगार मोमिनों के चेहरे पर कुछ धब्बे, गर्द या फीका पन ज़रूर हो सकता है, जो उनकी अख़लाक़ी कमज़ोरियों की अलामत होगी।

क़यामत के दिन इंसानों के चेहरे उनके दिलों की हालत को बयान करेंगे, जैसे एक ज़िंदा किताब हो जो अल्लाह की ओर से बयान कर रही हो। जिस तरह दुनिया में चेहरा बीमारियों का इज़हार करता है, उसी तरह उस दिन चेहरों से परहेज़गारी या गुनाह की पहचान हो जाएगी। उलमा और औलिया के चेहरे उनके नूर से पहचाने जाएंगे।

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