Transliteration: (Wa ammal lazeena bi yaddat wujoohuhum fafee rahmatil laahi hum feehaa khaalidoon)
इस आयत से हमें यह पता चलता है कि जिनके चेहरे काले होंगे — जैसा कि पिछली आयत में आया — वो हमेशा जहन्नम में रहेंगे, और जिनके चेहरे सफ़ेद होंगे, वे अल्लाह की रहमत यानी जन्नत में सदा रहेंगे। इससे दो अहम बातें सामने आती हैं:
क़यामत के दिन इंसानों के चेहरे उनके दिलों की हालत को बयान करेंगे, जैसे एक ज़िंदा किताब हो जो अल्लाह की ओर से बयान कर रही हो। जिस तरह दुनिया में चेहरा बीमारियों का इज़हार करता है, उसी तरह उस दिन चेहरों से परहेज़गारी या गुनाह की पहचान हो जाएगी। उलमा और औलिया के चेहरे उनके नूर से पहचाने जाएंगे।
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