कुरान - 3:111 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

111
لَن يَضُرُّوكُمۡ إِلَّآ أَذٗىۖ وَإِن يُقَٰتِلُوكُمۡ يُوَلُّوكُمُ ٱلۡأَدۡبَارَ ثُمَّ لَا يُنصَرُونَ

Transliteration: (Lai yadurrookum 'illaaa azanw wa ai yuqaatilookum yuwallookumul adbaara summa laa yunsaroon)

वे तुम्हें मामूली तकलीफ़ (अज़िय्यत) के सिवा कोई नुक़सान नहीं पहुंचा सकते; और अगर वे तुमसे लड़ेंगे तो पीठ फेरकर भाग जाएंगे, फिर उन्हें कोई मदद नहीं मिलेगी। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह आल-इमरान आयत 111 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह आले इमरान - आयत 111

✅ दुश्मनों की बेबसी और शिकस्त

अल्लाह ने मोमिनों को इत्मीनान दिलाया कि मुनकिरीन ज़बानी तानेबाज़ी के सिवा तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ सकते और मैदान-ए-जंग में पीठ फेरकर भागेंगे।

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